इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ‘बुलडोजर जस्टिस’ पर बड़ा सवाल उठाया, 9 फरवरी को सुनवाई

राज्य सरकार से पूछा कि क्या किसी अपराध के तुरंत बाद किसी इमारत को गिराना कार्यकारी विवेक का दिखावटी इस्तेमाल है।

उत्तर प्रदेश में सरकारी कार्रवाई पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कड़ा सवाल उठाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2024 के ‘बुलडोजर जस्टिस’ फैसले के बावजूद इमारतों को गिराने की दंडात्मक कार्रवाई जारी रखना उचित है। कोर्ट ने इस संदर्भ में सरकारी अधिकारियों के अधिकारों के गलत इस्तेमाल पर भी चिंता व्यक्त की।

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से पूछा कि क्या किसी अपराध के तुरंत बाद किसी इमारत को गिराना कार्यकारी विवेक का दिखावटी इस्तेमाल है।

कोर्ट ने इस मामले में पांच अहम सवाल तय किए, जिनमें यह पूछा गया है कि क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया गया है? इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि क्या गिराने का अधिकार किसी स्ट्रक्चर को गिराने के लिए सही ठहराता है और क्या राज्य का यह कर्तव्य है कि वह सार्वजनिक ज़रूरत के बिना किसी संरचना को न गिराए।

हाई कोर्ट ने यह भी पूछा कि यदि नागरिकों को ‘उचित डर’ है तो क्या उन्हें कोर्ट में आकर अपनी चिंता जताने का अधिकार है। मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी, और इस पर राज्य सरकार से जवाब मांगा जाएगा।

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