ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन हिंसक, 2,000 से अधिक की मौत…अली लारीजानी ने ट्रंप और नेतन्याहू को कहा जिम्मेदार

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन अब तक सबसे हिंसक रूप में बदल चुके हैं, जिसमें मरने वालों की संख्या 2,000 के पार पहुँच चुकी है। इस बीच, ईरान के...

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन अब तक सबसे हिंसक रूप में बदल चुके हैं, जिसमें मरने वालों की संख्या 2,000 के पार पहुँच चुकी है। इस बीच, ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने मंगलवार को एक बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को ईरानी जनता का “मुख्य हत्यारा” करार दिया। लारीजानी का यह बयान तब आया जब ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में ईरानी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित सभी बैठकें रद्द कर दीं और प्रदर्शनकारियों को सरकारी संस्थानों पर कब्जा करने का आह्वान किया।

लारीजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, “हम ईरानी जनता के असली कातिलों के नाम घोषित करते हैं: पहला ट्रंप और दूसरा नेतन्याहू।” उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल ईरान में अस्थिरता और हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं।

ट्रंप की चेतावनी और ईरान की स्थिति

इससे पहले, डोनाल्ड ट्रंप ने ‘डुंड सोशल’ पर एक पोस्ट शेयर करते हुए प्रदर्शनकारियों से कहा, “ईरानी देशभक्तों, विरोध जारी रखो, अपने संस्थानों पर कब्जा कर लो, मदद आ रही है।” हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट नहीं किया कि यह मदद किस रूप में होगी। इसके साथ ही, ट्रंप ने एक इंटरव्यू में ईरान को सख्त चेतावनी दी और कहा कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों को फांसी देना शुरू करता है, तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने यह भी साफ किया कि जब तक प्रदर्शनकारियों की हत्याएं नहीं रुकतीं, वे ईरान के साथ किसी भी स्तर की बातचीत नहीं करेंगे।

ईरान में हिंसा और संघर्ष बढ़े, मानवाधिकार संगठन चिंता में

मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों में ईरान में स्थिति गंभीर हो गई है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब तक 2,003 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि कुछ अंतरराष्ट्रीय स्रोतों का दावा है कि मृतकों की संख्या 12,000 से 20,000 के बीच हो सकती है। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने पहली बार अप्रत्यक्ष रूप से मौतों को स्वीकार करते हुए कहा कि देश में कई शहीद हुए हैं।

प्रदर्शनकारियों के आक्रोश का मुख्य कारण देश की गिरती अर्थव्यवस्था और मुद्रा का अवमूल्यन है, जिसने सत्ता परिवर्तन की मांग को जन्म दिया है। हाल ही में खबरें आई थीं कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत करना चाहता है, लेकिन ट्रंप के ताजा रुख ने इन संभावनाओं को समाप्त कर दिया है। इसके अलावा, ट्रंप ने यह भी घोषणा की है कि जो देश ईरान के साथ व्यापार करेंगे, उन पर 25% आयात शुल्क लगाया जाएगा।

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