हर साल सबसे अधिक पेड़ गंवा रहा है अरुणाचल प्रदेश, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की यह रिपोर्ट चिंताजनक!

ISFR 2021 ने अरुणाचल के 11 जिलों में वनावरण विस्तार को लेकर नकारात्मक बदलाव दिखाया है। इन जिलों में से प्रदेश की निचली दिबांग घाटी, दिबांग घाटी, लोहित और अंजॉ में भारी संख्या में वन आवरण के मानक पैमानों में नकारात्मक बदलाव दर्ज किया गया है।

पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन हमेशा वैश्विक चिंता और परिचर्चा का विषय रहा है। सोमवार को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी किये गए इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2021 (India State of Forest Report 2021) में हैरान कर देने वाली बात सामने आई है। इस रिपोर्ट में पर्यावरण कार्यकर्ताओं, वकीलों और शिक्षाविदों के उन कथनों का पुरजोर समर्थन किया गया है जिनमें वनों से आच्छादित देश के कुछ राज्यों में वन आवरण के कम होने की स्थिति चिंताजनक बताई गई थी।

India State of Forest Report 2021 में वनों से आच्छादित भारत के दूसरे सबसे बड़े राज्य अरुणाचल प्रदेश को लेकर चिंताजनक जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पूर्वोत्तर के राज्य अरुणाचल प्रदेश में हर गुजरते साल के साथ बड़े पैमाने पर वन आवरण काम हो रहा है। अरुणाचल प्रदेश अपने प्राथमिक जंगलों को लगातार खो रहा है। रिपोर्ट में यह भी जानकारी दी गई है कि प्रदेश के 16 में से केवल पांच जिलों में वृक्षारोपण को लेकर कुछ सकारात्मक आंकड़े पाए गए हैं जबकि शेष जिलों में वनों का बड़े पैमाने पर सफाया हो रहा है।

ISFR 2021 ने अरुणाचल के 11 जिलों में वनावरण विस्तार को लेकर नकारात्मक बदलाव दिखाया है। इन जिलों में से प्रदेश की निचली दिबांग घाटी, दिबांग घाटी, लोहित और अंजॉ में भारी संख्या में वन आवरण के मानक पैमानों में नकारात्मक बदलाव दर्ज किया गया है। ISFR 2021 ने बताया है कि अरुणाचल प्रदेश में ठेकेदारों द्वारा वन क्षेत्रों के ढलान वाले हिस्सों पर सड़क निर्माण का मलबा डालना बढ़ रहा है जो की अधिकांश जिलों में जोरों पर है। इससे वन भूमि में उगने वाले छोटे पौधे भी नष्ट हो जाते हैं जो आंकड़ों को चिंताजनक बनाने के लिए पर्याप्त हैं।

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