विधानसभा चुनाव 2022 : पांच राज्यों का जनादेश तय करेगा 2024 में केंद्र की सत्ता? BJP-कांग्रेस के लिए अग्निपरीक्षा की घड़ी!

पंजाब को छोड़कर शेष चार राज्यों में भाजपा, सत्ताधारी दल है। इन राज्यों को फिर से जीतने के लिए मोदी के नाम और काम का इस्तेमाल भाजपा पूरे जोर-शोर से कर रही है। चुनाव वाले पंजाब में प्रधानमंत्री की सुरक्षा के कथित "उल्लंघन" के मुद्दे को भाजपा ने जिस प्रचार मोड के साथ उठाया, वह इस बात का स्पष्ट संकेत था कि सत्ताधारी पार्टी अगले कुछ हफ्तों में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में पीएम मोदी के व्यक्तित्व को किस तरह पेश करेगी।

अब से कुछ ही हफ्ते बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर के लोग नई सरकार चुनने के लिए मतदान करेंगे। पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों को 2024 के लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। पांचों राज्यों के चुनावी परिणाम काफी हद तक यह साफ कर देंगे कि 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर से सत्ता में लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए भाजपा का नेतृत्व करेंगे या कांग्रेस एक उभरती हुई पार्टी के रूप में सामने आएगी अथवा लोगों को कोई दूसरा विकल्प मिलेगा।

2024 में मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए की जीत का मतलब उनके लिए हैट्रिक होगा। इसका मतलब कांग्रेस के लिए हार की हैट्रिक भी होगी। यदि, कोविड-19 के आसपास के सभी नकारात्मक प्रचार और साल भर के किसान आंदोलन से निपटने के बावजूद, विशेष रूप से 80 लोकसभा सीटों वाली यूपी में अगर भाजपा विधानसभा चुनाव जीतती है, तब 2024 के आम चुनावों से पहले विपक्ष का एकजुट अभियान भाप खो देगा।

यह मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में 2023 के चुनावों से पहले विपक्ष और विशेष रूप से कांग्रेस के लिए भी मनोबल गिराने वाला होगा। 2018 में, कांग्रेस को तीनों तत्कालीन भाजपा शासित राज्यों में 3:0 से जीत मिली थी। इसके बाद 2020 की शुरुआत में जब मप्र कांग्रेस का बड़ा चेहरा ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थकों के साथ भाजपा में चले गए तो यह पार्टी के लिए बहुत बड़ा झटका रहा।

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव ऐसे समय में होने वाले हैं, जब 2021 में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की लगातार तीसरी जीत के साथ क्षेत्रीय दलों की आकांक्षाएं चरम पर हैं। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की लगातार तीसरी जीत का प्रभाव गोवा विधानसभा चुनाव पर भी देखने को मिल रहा है जहां TMC तीसरी बड़ी ताकत के रूप में उभर रही है। उधर दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी AAP गोवा और उत्तराखंड में मुफ्त बिजली के वादे के साथ अपने दिल्ली शासन प्रणाली को भुनाने की कोशिश कर रही है।

पंजाब को छोड़कर शेष चार राज्यों में भाजपा, सत्ताधारी दल है। इन राज्यों को फिर से जीतने के लिए मोदी के नाम और काम का इस्तेमाल भाजपा पूरे जोर-शोर से कर रही है। चुनाव वाले पंजाब में प्रधानमंत्री की सुरक्षा के कथित “उल्लंघन” के मुद्दे को भाजपा ने जिस प्रचार मोड के साथ उठाया, वह इस बात का स्पष्ट संकेत था कि सत्ताधारी पार्टी अगले कुछ हफ्तों में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में पीएम मोदी के व्यक्तित्व को किस तरह पेश करेगी। इस बात का संकेत इससे भी मिलता है कि गृह मंत्री अमित शाह ने नवंबर में यूपी के मतदाताओं से कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों में मोदी की जीत के लिए 2022 में योगी आदित्यनाथ की जीत जरूरी है।

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