
आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता व दिल्ली कैबिनेट मंत्री आतिशी ने पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता कर कहा कि भाजपा अपने कामों के दम पर नहीं, बल्कि सीबीआई-ईडी का इस्तेमाल करते हुए चुनाव जीतना चाहती है और ईडी के समन की स्क्रिप्ट भाजपा के हेडक्वार्टर में तैयार की जाती है। पहले भाजपा तय करती है कि किसे गिरफ़्तार करना है, उसके आधार पर ईडी अपना केस शुरू करती है। उन्होंने कहा कि ईडी का समन ग़ैरक़ानूनी है। लोकसभा के चुनावों से ठीक पहले लगातार समन पर समन भेजना सबूत है कि ये पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है। भाजपा के समन का सिर्फ़ और सिर्फ़ एक कारण है- भाजपा नहीं चाहती है कि अरविंद केजरीवाल लोकसभा के चुनावों में प्रचार करें।
उन्होंने कहा कि आज भाजपा का एक ही मक़सद है कि किसी न किसी तरह से या तो विपक्ष के नेताओं को जेल में डाल दो या फिर ईडी-सीबीआई से डरा-धमकाकर उन्हें भाजपा में शामिल कर लो। पिछले 6 महीने का रिकॉर्ड दिखाता है कि भाजपा के इशारे पर एक के बाद एक सीबीआई-ईडी द्वारा विपक्ष के नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि भाजपा अपने 10 साल के काम के दम पर नहीं, बल्कि ईडी-सीबीआई के दम पर लोकसभा चुनाव जीतना चाहती है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने 10 साल से इस देश में सरकार चलाई है, अगर हिम्मत है तो अपने काम के दम पर चुनाव लड़कर दिखाए, सीबीआई-ईडी के माध्यम से चुनाव जीतने की कोशिश न करे।
‘‘आप’’ नेता आतिशी ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जब ईडी से पहला समन आया था, तब हमने ये कहा था कि ये ईडी का नहीं बल्कि भाजपा का समन है और आज इस बात को भाजपा के एक प्रवक्ता गौरव भाटिया ने प्रेस-कांफ्रेंस कर साबित कर दिया। उन्होंने कहा कि ईडी अरविंद केजरीवाल को गिरफ़्तार करेगी, उन्हें जेल में डालेगी। मैं भाजपा और उसके प्रवक्ताओं से पूछना चाहती हूं कि जब ईडी अपने समन में ये नहीं लिखती है कि अरविंद केजरीवाल को गवाह के तौर पर बुला रहे हैं या आरोपी के तौर पर बुला रहे हैं, उन्हें दिल्ली के मुख्यमंत्री के तौर पर बुलाया जा रहा है या फिर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के तौर पर। वहीं, भारतीय जनता पार्टी को कैसे पता चल जाता है कि इस समन के बाद या जब अरविंद केजरीवाल ईडी के पास जाएंगे तो उन्हें गिरफ़्तार कर लिया जाएगा। भाजपा को कैसे पता चलता है कि ईडी का ये समन अरविंद केजरीवाल को गिरफ़्तार करने के लिए भेजा जा रहा है।
‘‘आप’’ की वरिष्ठ नेता आतिशी ने कहा कि ये भाजपा और उसके प्रवक्ताओं को इसलिए पता चलता है, क्योंकि ईडी के समन का स्क्रिप्ट भाजपा के हेडक्वार्टर में लिखा जाता है। पहले भाजपा तय करती है कि किसे गिरफ़्तार करना है, जेल में डालना है और उसके आधार पर सीबीआई-ईडी को केस शुरू करने, समन करने, घरों पर छापा मारने के लिए कहा जाता है और यही आज दिल्ली में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ हो रहा है। उन्होंने कहा कि 2 साल से इस तथाकथित शराब घोटाले की जांच हो रही है। ईडी-सीबीआई के 500 से ज़्यादा ऑफ़िसर इसकी जांच कर रहे है, लेकिन 2 साल के बाद भी इन्हें 1 पैसे के भ्रष्टाचार का सबूत नहीं मिला, उसके बावज़ूद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को समन पर समन भेजा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 2 साल के बाद ऐसा क्या हो गया कि मात्र 1 महीने के भीतर ईडी को 4-4 समन भेजने पड़े। इसका सिर्फ़ एक कारण है कि लोकसभा चुनाव आ रहे हैं और भाजपा नहीं चाहती है कि अरविंद केजरीवाल लोकसभा के चुनावों में प्रचार करें। दूसरी तरफ़ हम ये देखते हैं कि जो विपक्ष का नेता सीबीआई-ईडी की धमकी से डरकर भाजपा में शामिल हो जाता है, उसके केस तुरंत बंद हो जाते हैं। इसका उदाहरण पूरे देश ने देखा है कि छगन भुजबल, जिनके नाम पर सिंचाई घोटाला, महाराष्ट्र सदन घोटाला जैसे बहुत से घोटाले हैं और सालों से सीबीआई-ईडी के केस चल रहे है। वह जैसे ही भाजपा में शामिल होते हैं तो ईडी हाई कोर्ट में जाकर कहती है कि हम केस बंद कर रहे हैं, क्योंकि हमारी फाइल खो गई है।









