
पिछले एक दशक में, भारत ने आर्थिक, तकनीकी, और रणनीतिक क्षेत्रों में गहरे बदलाव देखे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल एक प्रमुख आर्थिक शक्ति ही नहीं, बल्कि एक रणनीतिक और तकनीकी दिग्गज भी बनेगा। उनके नेतृत्व में, भारत ने एक आत्मनिर्भर और लचीला राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बनाई है।
“Make in India”: आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम
2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने “Make in India” अभियान की शुरुआत की, जो भारत के वैश्विक निर्माण मूल्य श्रृंखला में एक सक्रिय और प्रमुख खिलाड़ी बनने का एक नया युग था। यह अभियान भारत को केवल एक उपभोक्ता देश के रूप में देखे जाने की बजाय एक विनिर्माण महाशक्ति बनाने की दिशा में था।
इस नीति ने भारतीय अर्थव्यवस्था में कई महत्वपूर्ण सुधारों को जन्म दिया। व्यापार करने में आसानी को सुधारने के लिए कई कदम उठाए गए, जैसे मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाना और निवेशकों को प्रोत्साहित करना। इसके अलावा, घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं की शुरुआत की गई, जिससे भारत के विनिर्माण क्षेत्र में नई जान फूंकी गई।
साक्षी बने क्षेत्र: इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और ऑटोमोबाइल
“Make in India” अभियान के तहत, भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों में महत्वपूर्ण निवेश हुआ। इसने भारतीय निर्माताओं को न केवल घरेलू बाजार में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर दिया। इसके परिणामस्वरूप, भारत ने कई बड़े वैश्विक खिलाड़ियों को आकर्षित किया, जैसे Apple, जो अब भारत में iPhone का निर्माण कर रहा है।
PLI योजना: एक नई राह
सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं ने कई प्रमुख क्षेत्रों को पुनः प्रोत्साहित किया, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, और रक्षा निर्माण। इन योजनाओं ने विदेशी और घरेलू कंपनियों के लिए भारत को एक आकर्षक निवेश स्थल बना दिया, जिससे उत्पादन की क्षमता में वृद्धि और रोजगार के अवसरों में सुधार हुआ।
आत्मनिर्भरता का उद्देश्य
“Make in India” के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने “आत्मनिर्भर भारत” का भी आह्वान किया, जिसका उद्देश्य भारतीय उत्पादों और सेवाओं को पूरी दुनिया में मान्यता दिलाना है। यह न केवल भारत के आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है, बल्कि देश की रणनीतिक शक्ति को भी मजबूत करता है।
भारत अब आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, और इसका उदाहरण उसके तेजी से बढ़ते विनिर्माण क्षेत्र, बढ़ते घरेलू निवेश और बढ़ते निर्यात के आंकड़े हैं। इसके साथ ही, भारत ने वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपने पैर जमा लिए हैं और आत्मनिर्भरता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।









