
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को दो पैन कार्ड मामले में समाजवादी पार्टी (SP) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान तथा उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को जमानत दे दी। अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को निलंबित कर दिया, हालांकि दोषसिद्धि पर रोक लगाने की उनकी याचिका खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति समीत गोपाल की एकल पीठ ने यह आदेश सुनाया। पिता-पुत्र ने ट्रायल कोर्ट के दोषसिद्धि संबंधी आदेश को चुनौती देते हुए आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी। उन्होंने दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा निलंबित करने और जमानत पर रिहाई की मांग की थी। अदालत ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद 15 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
सजा निलंबित होने और जमानत मिलने से दोनों नेताओं को अंतरिम राहत मिली है। हालांकि, दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगने के कारण संबंधित कानून के तहत उनकी चुनाव लड़ने की अयोग्यता पर कोई बदलाव नहीं हुआ है।
क्या है आजम खान और अब्दुल्ला आजम का दो पैन कार्ड मामला ?
यह मामला अब्दुल्ला आजम खान के कथित तौर पर अलग-अलग जन्मतिथियों के आधार पर दो अलग-अलग स्थायी खाता संख्या (PAN) कार्ड बनवाने और रखने के आरोपों से जुड़ा है। इस मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम दोनों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू हुई थी।
जौहर यूनिवर्सिटी पर ED की बड़ी कार्रवाई, जमीन और इमारत अटैच
गौरतलब की बात यह है की, 28 अक्टूबर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारत को अटैच किया था। इनकी बुक वैल्यू 426 करोड़ रुपये और अनुमानित मौजूदा बाजार कीमत 1,170 करोड़ रुपये बताई गई है।
ED के लखनऊ जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत यह कार्रवाई की। यह मामला मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, आजम खान और अन्य के खिलाफ कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।
जौहर नगर स्थित सिंहानखेड़ा गांव में यूनिवर्सिटी परिसर मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के स्वामित्व में है। इस ट्रस्ट की स्थापना आजम खान ने की थी और वह इसे नियंत्रित करते हैं। आजम खान यूनिवर्सिटी के मानद कुलाधिपति भी हैं।
किसानों की जमीन पर कब्जे के आरोपों की ED कर रही जांच
ED ने रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 FIR के आधार पर PMLA के तहत जांच शुरू की थी। इन FIR में भारतीय दंड संहिता की धारा 384 सहित अन्य धाराओं के तहत किसानों की कृषि भूमि कथित तौर पर जबरन कब्जाने के आरोप लगाए गए थे।
रामपुर जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए ED ने यह भी कहा कि सिंहानखेड़ा गांव में करीब 34 एकड़ में फैले शत्रु संपत्ति के 45 भूखंडों पर भी यूनिवर्सिटी के लिए अवैध रूप से कब्जा किया गया था। एजेंसी के अनुसार, ट्रस्ट को इस जमीन पर दिया गया पट्टा निरस्त होने के बाद भी कथित कब्जा जारी रहा।









