
बांग्लादेश में हाल ही में हुए चुनावों ने देश की राजनीतिक स्थिति में हलचल मचा दी है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की जीत के बाद, सत्ता से मोहम्मद युनुस को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इस घटनाक्रम के बाद अब सवाल यह उठता है कि डॉ. मोहम्मद युनुस का भविष्य क्या होगा? क्या उन्हें फिर से निर्वासन का सामना करना पड़ेगा?
बांग्लादेश-भारत रिश्तों में उतार-चढ़ाव
हालिया घटनाओं से यह साफ है कि बांग्लादेश और भारत के रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक तरफ भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सशक्त संबंध बनाए रखने की बात की है, लेकिन दूसरी तरफ बांग्लादेश में नए राजनीतिक संकट की आहट भी है।
पीएम मोदी की मान्यता
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, BNP की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य नजरुल इस्लाम खान ने कहा कि “पीएम मोदी ने बांग्लादेश के चुनावी परिणामों को मान्यता दी है। भारत ने चुनाव नतीजों पर पहले से ही करीबी नजर रखी थी।” यह बयान तब आया जब बांग्लादेश और पाकिस्तान के रिश्तों में भी सुधार देखने को मिल रहा था।
BNP का एजेंडा
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता अमीर खसरू महमूद चौधरी ने कहा कि यदि BNP सत्ता में आई तो उनकी प्राथमिकता देश से अस्थिरता खत्म करना और देश की संस्थाओं को फिर से मजबूत करना होगी। चौधरी ने यह भी कहा कि पिछले 10 वर्षों में बर्बाद हुए संस्थानों को ठीक करना बहुत जरूरी है। बांग्लादेश में स्थिरता को वह सबसे बड़ी प्राथमिकता मानते हैं।
भारत के साथ रिश्ते
जब चौधरी से यह पूछा गया कि BNP सरकार भारत के साथ कैसे रिश्ते रखना चाहती है, तो उन्होंने किसी विशेष देश का नाम नहीं लिया। हालांकि, उन्होंने कहा कि “किसी भी देश के साथ हमारा रिश्ता आपसी सम्मान और एक-दूसरे के मामलों में दखल न देने वाला होना चाहिए।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बांग्लादेश फर्स्ट की नीति पर आगे बढ़ते हुए, बांग्लादेश को केंद्रित पॉलिसी पर ध्यान देने की आवश्यकता है।









