MSME सेक्टर को बड़ा बढ़ावा: सरकार ने Mutual Credit Guarantee Scheme में किया बदलाव, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट को मिलेगी रफ्तार

नई गाइडलाइंस के तहत अब इस योजना का दायरा बढ़ाकर सर्विस सेक्टर के MSMEs को भी शामिल कर लिया गया है, जिससे अधिक व्यवसायों को इसका लाभ मिल सकेगा।

केंद्र सरकार ने माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइज (MSME) सेक्टर को मजबूत करने के लिए Mutual Credit Guarantee Scheme (MCGS-MSME) में अहम बदलाव किए हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह कदम बजट 2025-26 के रोडमैप के तहत उठाया गया है, जिसका उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट सेक्टर को बढ़ावा देना है।

सरकार द्वारा किए गए इन संशोधनों का मुख्य फोकस MSMEs को प्लांट और मशीनरी खरीदने के लिए अधिक आसान और सुलभ ऋण उपलब्ध कराना है। नई गाइडलाइंस के तहत अब इस योजना का दायरा बढ़ाकर सर्विस सेक्टर के MSMEs को भी शामिल कर लिया गया है, जिससे अधिक व्यवसायों को इसका लाभ मिल सकेगा।

सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि अब प्रोजेक्ट कॉस्ट में मशीनरी और उपकरणों पर न्यूनतम खर्च की सीमा 75% से घटाकर 60% कर दी गई है। इससे उद्यमियों को अपने प्रोजेक्ट में अधिक लचीलापन मिलेगा। इसके साथ ही गारंटी अवधि को 10 साल तक तय किया गया है, जिससे लंबी अवधि तक वित्तीय सहायता सुनिश्चित होगी।

सरकार ने MSME इकाइयों की लिक्विडिटी को ध्यान में रखते हुए 5% की अपफ्रंट राशि को रिफंडेबल बना दिया है। यह राशि चौथे वर्ष से हर साल 1% के हिसाब से वापस की जाएगी, बशर्ते लोन अकाउंट संतोषजनक स्थिति में हो।

एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। ऐसे MSMEs, जिनका पिछले तीन वर्षों में कम से कम 25% कारोबार निर्यात से आया हो, उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा। इन इकाइयों को 20 करोड़ रुपये तक का गारंटीड लोन मिलेगा, जिसमें 75% तक गारंटी कवर दिया जाएगा।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, MSME सेक्टर भारत के GDP में लगभग 30% और निर्यात में 45% से अधिक योगदान देता है, साथ ही करोड़ों लोगों को रोजगार प्रदान करता है। ऐसे में इस योजना में किए गए बदलाव ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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