
प्रयागराज; इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की खंडपीठ ने फैसला सुनाया है कि एक घोषित भगोड़ा अपराधी को सीआरपीसी की धारा 438 के तहत अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करने से मना नहीं किया जा सकता है.
अदालत ने कहा कि न तो धारा 82 सीआरपीसी और न ही धारा 438 सीआरपीसी घोषित (भगोड़े) अपराधियों द्वारा अग्रिम जमानत आवेदन दाखिल करने पर कोई प्रतिबंध लगाती है.
प्रयागराज
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) May 6, 2023
➡️अग्रिम जमानत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला
➡️भगोड़ा अपराधी भी अग्रिम जमानत दाखिल करने का हकदार
➡️जस्टिस कृष्ण पहल की खंडपीठ ने सुनाया फैसला
➡️CRPC की धारा 438 के तहत मना नहीं कर सकते- HC
➡️अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करने से मना नहीं कर सकते
➡️कोर्ट ने एक मामले में… pic.twitter.com/bB9vqLAs4C
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आरोपी उदित आर्य को अग्रिम जमानत दे दी. जिस पर अपनी पत्नी की दहेज हत्या के आरोप में आईपीसी की धारा 498-ए, 304-बी व 3/4 DP एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था. प्रस्तुत मामला मेरठ के गंगानगर थाने का है, जहां पिता ने अपने दामाद पर दहेज हत्या का आरोप लगाया था और 2021 में FIR दर्ज कराई थी. उक्त मामले में आरोपी फरार चल रहा था, अदालत ने कहा कि फरारी की उद्घोषणा होना मात्र किसी व्यक्ति को अग्रिम जमानत से वंचित नहीं कर सकता. हाई कोर्ट ने अभियुक्त को अग्रिम जमानत प्रदान की.









