डॉ. राजेश्वर सिंह ने हैप्पीनेस इंडेक्स रिपोर्ट 2024 को दी चुनौती, कहा- वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को धूमिल करने का कुत्सित प्रयास

दोनों देशों के बीच आर्थिक विषमताओं पर चर्चा करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि भारत की जीडीपी 3.39 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि पाकिस्तान की जीडीपी 376 बिलियन डॉलर है।

सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने हाल ही में जारी हुई ग्लोबल हैप्पीनेस इंडेक्स को चुनौती दी और इसे जारी करने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए भारत व पाकिस्तान के बीच असमानताओं पर आंकड़ों पर सवाल खड़े किए हैं। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर डॉ. सिंह ने अनेक तथ्यों पर प्रश्न खड़े किए हैं। 

आर्थिक विषमता

दोनों देशों के बीच आर्थिक विषमताओं पर चर्चा करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि भारत की जीडीपी 3.39 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि पाकिस्तान की जीडीपी 376 बिलियन डॉलर है। हमारे देश की विदेशी मुद्रा भंडार 642 बिलियन डॉलर है लेकिन पाकिस्तान का मात्र 8 बिलियन डॉलर है। पाकिस्तान में मुद्रा स्फीति 23% है और भारत में 5.09% है।

साक्षरता दर में बड़ा अंतर  

राजेश्वर​ सिंह ने बताया कि हमारे देश में साक्षरता दर 77% है जबकि पड़ोसी देश में यह 59% है। भारत की लाइफ एक्सपेक्टेंस 71 वर्ष है जबकि पाकिस्तान की 66.5 वर्ष है। गरीबी दर की बात करें तो भारत के ग्रामीण क्षेत्र में 11.6% और शहरी में 6.3% जबकि पाकिस्तान की गरीबी दर 40% है।

12 सबसे खतरनाक विदेशी आतंकवादी संगठनों का देश पाकिस्तान

उन्होंने दोनों देशों के बीच के अंतरों के बारे में जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान की स्थिति आतंकवाद के केंद्र के रूप में है, जो आईएसआईएस सहित 12 सबसे खतरनाक विदेशी आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देता है। देश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं के विरुद्ध उच्च स्तर की धार्मिक हिंसा होती है। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की चिंताजनक दर, शारीरिक उत्पीड़न और बाल श्रम की लगातार घटनाओं की खबरें सामने आती रहती है। असुरक्षित पेयजल के कारण हर साल 2.5 लाख बच्चों की मौत हो जाती है।

देश के वैश्विक स्थिति को धूमिल करने का कुत्सित प्रयास

भाजपा के विधायक डॉ. सिंह ने अपने एक्स में तथ्यों के माध्यम से दोनों देशों के बीच असमानताओं के बावजूद पाकिस्तान को भारत से ऊपर रैंकिंग देने के लिए वैश्विक प्रसन्नता सूचकांक की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा पक्षपातपूर्ण चित्रण भारत की उल्लेखनीय वृद्धि और वैश्विक स्थिति को धूमिल करने का कुत्सित प्रयास किया गया है। डॉ. सिंह ने भारत की प्रगति और क्षमता को पहचानने में विफल रहने वाले इस पक्षपातपूर्ण आकलन को चुनौती देने और नकारने की आवश्यकता का आग्रह किया।

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