नोएडा एयरपोर्ट की पहली उड़ान के आयोजन में भाजपा की अंदरूनी कलह खुलकर आई सामने, सांसद-विधायकों को नहीं भेजा गया आमंत्रण

नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पहली व्यावसायिक उड़ान के ऐतिहासिक मौके पर भारतीय जनता पार्टी के भीतर पिछले कई दिनों से चल रही अंदरूनी खींचतान शनिवार को खुलकर सामने आ गई। कार्यक्रम में गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा, राज्यसभा सदस्य सुरेंद्र नागर, दादरी विधायक तेजपाल नागर, क्षेत्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिसौदिया, जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा, विधान परिषद सदस्य नरेंद्र भाटी व श्रीचंद शर्मा और जिला पंचायत अध्यक्ष अमित चौधरी समेत कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों को औपचारिक न्योता तक नहीं भेजा गया, जिससे नाराज नेताओं ने सीधे पार्टी हाईकमान से शिकायत कर दी है।

क्षेत्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिसौदिया ने पूरे मामले से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अवगत कराया, जिसके बाद मामले ने गंभीर तूल पकड़ लिया। अब केंद्रीय और राज्य नेतृत्व दोनों ने इस प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। पार्टी कार्यकर्ताओं के अनुसार, जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह को राज्यसभा सदस्य सुरेंद्र नागर का करीबी माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद सुरेंद्र नागर को आमंत्रित नहीं किया गया। भाजपा नेताओं ने इस बात पर भी सवाल खड़े किए कि कार्यक्रम में केवल यमुना प्राधिकरण के सीईओ और जेवर विधायक को ही क्यों बुलाया गया, जबकि अन्य जनप्रतिनिधियों की पूरी तरह अनदेखी की गई।

सूत्रों की मानें तो भाजपा में जनप्रतिनिधियों और संगठन के बीच तालमेल बिठाने की जिम्मेदारी प्रभारी मंत्री की होती है, लेकिन कार्यक्रम स्थल पर मौजूद प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री बृजेश सिंह भी इस सामंजस्य को स्थापित करने में नाकाम रहे। इस पर सफाई देते हुए बृजेश सिंह ने कहा कि वह मुख्यमंत्री के आदेश पर केंद्रीय राज्य मंत्री की अगवानी के लिए कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उन्होंने बताया कि यह आयोजन यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड यानी यापल का था और वह खुद एक रात पहले एक बजे ग्रेटर नोएडा पहुंचे थे। यमुना प्राधिकरण के सीईओ से जब उन्होंने आमंत्रण के बारे में पूछा तो उन्हें बताया गया कि यापल के सीईओ को सभी जनप्रतिनिधियों के नंबर उपलब्ध करा दिए गए थे। बृजेश सिंह ने यह भी साफ किया कि 22 या 23 जून को लखनऊ जाकर वह मुख्यमंत्री से पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

भाजपा के जनप्रतिनिधियों और जिला कार्यकारिणी ने इस मामले की शिकायत हाईकमान तक पहुंचा दी है, जिस पर केंद्रीय और राज्य नेतृत्व ने गंभीर चिंता जताते हुए पूरी रिपोर्ट मांगी है। हालांकि प्रभारी मंत्री ने इसे यापल का कार्यक्रम करार दिया, लेकिन भाजपा नेता इससे सहमत नहीं हैं। उनका आरोप है कि यापल और यमुना प्राधिकरण ने मिलकर चुनिंदा लोगों को ही आमंत्रित किया, जबकि नोएडा प्राधिकरण की इस परियोजना में 37.5 प्रतिशत और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 12.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

बावजूद इसके, दोनों प्राधिकरणों के अधिकारियों को भी नजरअंदाज कर दिया गया। इससे साफ संकेत मिलता है कि इस भव्य आयोजन में राजनीतिक समीकरण हावी रहे और एयरपोर्ट जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना के उद्घाटन से दूर रखे जाने को नेताओं ने अपनी सीधी उपेक्षा माना है। अब सभी की निगाहें 22-23 जून की उस मुलाकात पर टिकी हैं, जब प्रभारी मंत्री बृजेश सिंह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस पूरे विवाद की विस्तृत रिपोर्ट सौंपेंगे।

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