भारत और दक्षिण एशिया में विमानन क्षेत्र में विस्फोटक वृद्धि, बोइंग का बड़ा अनुमान

इतना ही नहीं अगले 20 सालों में क्षेत्र को 45,000 पायलट, 45,000 टेक्नीशियन और 51,000 केबिन क्रू सदस्यों की आवश्यकता होगी.

दुनिया के कुछ देशों में विमानों की डिमांड कुछ ज्यादा बढ़ गई है. अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत और दक्षिण एशिया इस मामले में टॉप पर है. जानकारी के लिए बता दें कि बोइंग ने अपने ‘कमर्शियल मार्केट आउटलुक’ में अनुमान जताया है कि साल 2044 तक भारत और दक्षिण एशिया को करीब 3,300 नए विमानों की जरूरत होगी.

यह अनुमान हैदराबाद में आयोजित ‘विंग्स इंडिया 2026’ समिट के दौरान पेश किया गया, जहां बोइंग के मैनेजिंग डायरेक्टर अश्विन नायडू ने बताया कि भारत अगले 20 सालों में विमानों के बेड़े में चार गुना वृद्धि देखेगा. इनमें से 90% यानी 2,875 विमान ‘सिंगल-आइल’ या नैरो-बॉडी जेट्स होंगे, जबकि 395 विमान वाइड-बॉडी होंगे.

बोइंग के अनुसार, इस वृद्धि के साथ विमानन क्षेत्र में स्किल्ड स्टाफ की भारी मांग होगी. इतना ही नहीं अगले 20 सालों में क्षेत्र को 45,000 पायलट, 45,000 टेक्नीशियन और 51,000 केबिन क्रू सदस्यों की आवश्यकता होगी.

भारत और दक्षिण एशिया में बढ़ते मिडिल क्लास और मजबूत होती अर्थव्यवस्था के कारण हवाई यात्रियों की संख्या में सालाना औसतन 7% की वृद्धि देखी जाएगी.साथ ही, विमानन सेवाओं जैसे मेंटेनेंस और ट्रेनिंग में 195 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश करने की आवश्यकता होगी. एयर कार्गो बाजार भी मैन्युफैक्चरिंग और ई-कॉमर्स के विस्तार से बढ़ेगा, और मालवाहक विमानों का बेड़ा पांच गुना बढ़ेगा.

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