भारत में निर्मित C-295 विमान, विदेश मंत्री ने दिया अहम जानकारी…

C-295 विमान का निर्माण वडोदरा स्थित टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) के महत्वपूर्ण प्लांट में चल रहा है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2024 में किया था। यह प्लांट भारत का पहला निजी क्षेत्र का सैन्य विमान निर्माण कारखाना है।

भारत में निर्मित C-295 विमान को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बड़ा अपडेट दिया है। स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बेरेस के साथ द्विपक्षीय बातचीत में, जयशंकर ने कहा कि वडोदरा स्थित फैक्ट्री से पहला C-295 विमान सितंबर से पहले तैयार हो जाएगा। यह विमान एयरबस टाटा असेंबली लाइन के तहत भारत में निर्मित हो रहा है, जो भारत और स्पेन के बीच बढ़ती रक्षा औद्योगिक साझेदारी को प्रदर्शित करता है।

बता दें, C-295 विमान का निर्माण वडोदरा स्थित टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) के महत्वपूर्ण प्लांट में चल रहा है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2024 में किया था। यह प्लांट भारत का पहला निजी क्षेत्र का सैन्य विमान निर्माण कारखाना है। भारतीय वायु सेना के पुराने हो चुके एवरो-748 विमानों को बदलने के लिए 56 C-295 विमानों का निर्माण शुरू किया गया है।

बता दें, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि यह प्रोजेक्ट भारत और स्पेन के बीच रक्षा औद्योगिक साझेदारी को और मजबूत करता है। उन्होंने बताया कि एयरबस टाटा असेंबली लाइन के तहत तैयार होने वाला पहला C-295 विमान वडोदरा फैक्ट्री से सितंबर से पहले निकलकर भारतीय वायु सेना के बेड़े में शामिल हो जाएगा।

इस दौरान, जयशंकर ने आतंकवाद से लड़ने के मुद्दे पर भारत और स्पेन के साझा प्रयासों पर भी जोर दिया। दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का संकल्प लिया है।

भारत ने सितंबर 2021 में एयरबस डिफेंस एंड स्पेस के साथ 21,935 करोड़ रुपये का एक बड़ा सौदा किया था, जिसके तहत भारत में C-295 विमानों का निर्माण किया जा रहा है। इस समझौते के तहत, एयरबस पहले 16 विमान ‘फ्लाई-अवे’ स्थिति में स्पेन से देगा, जबकि बाकी 40 विमानों का निर्माण भारत में TASL द्वारा किया जाएगा।

पहले 16 विमान भारतीय वायु सेना को सितंबर 2023 से अगस्त 2025 के बीच मिलेंगे। पहले विमान का वितरण 13 सितंबर 2023 को ही किया जा चुका है। भारत में निर्मित पहला C-295 विमान 2026 में उत्पादन इकाई से बाहर आएगा, और शेष 39 विमानों का निर्माण 2031 तक पूरा हो जाएगा।

वहीं, यह सौदा भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा और भारतीय वायु सेना की ताकत को और बढ़ाएगा।

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