सीबीआई ने 1.5 करोड़ की रिश्वत मामले में IRS अधिकारी प्रब्धा भंडारी को पकड़ा, कॉल से हुआ बड़ा खुलासा

बहुत अच्छा," और फिर उन्होंने ₹70 लाख को सोने में बदलवाने के निर्देश दिए। यह पूरी बातचीत रिकॉर्ड की गई, जो अब सीबीआई के पास एक निर्णायक सबूत के रूप में मौजूद है।

सीबीआई ने 2016 बैच की आईआरएस अधिकारी प्रब्धा भंडारी, जो वर्तमान में केंद्रीय जीएसटी की उप आयुक्त हैं, को ₹1.5 करोड़ की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी एक महत्वपूर्ण कॉल के बाद हुई, जो सीबीआई अधिकारियों की निगरानी में की गई थी और जो इस मामले में सबसे सशक्त सबूत साबित हुई। इस कॉल के माध्यम से रिश्वत की डील और इसके पीछे की साजिश पूरी तरह से उजागर हो गई।

70 लाख की रिश्वत के पहले किस्त की स्वीकारोक्ति

सीबीआई के अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन की शुरुआत उस समय हुई जब सीबीआई ने झांसी स्थित केंद्रीय जीएसटी दफ्तर में तैनात दो सुपरिंटेंडेंट्स, अनिल तिवारी और अजय कुमार शर्मा को ₹70 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। इन अधिकारियों के पूछताछ करने पर दोनों ने अपनी वरिष्ठ अधिकारी प्रब्धा भंडारी का नाम लिया और उन्हें इस ₹1.5 करोड़ के घोटाले का मास्टरमाइंड बताया।

सीबीआई को अब इन आरोपियों से एक और मजबूत सबूत की जरूरत थी। इसके लिए, एक गिरफ्तार सुपरिंटेंडेंट को सीबीआई ने रणनीतिक रूप से भंडारी से फोन पर बात करने के लिए कहा, और उन्होंने फोन पर भंडारी से ₹70 लाख की पहली किश्त की स्वीकारोक्ति की। इस कॉल के बाद भंडारी का जवाब था, “बहुत अच्छा,” और फिर उन्होंने ₹70 लाख को सोने में बदलवाने के निर्देश दिए। यह पूरी बातचीत रिकॉर्ड की गई, जो अब सीबीआई के पास एक निर्णायक सबूत के रूप में मौजूद है।

गिरफ्तारी और सीबीआई की जांच

प्रभा भंडारी उस समय दिल्ली में थीं, लेकिन सीबीआई की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया, जबकि एक अन्य टीम ने झांसी में उनके फ्लैट की छापेमारी की। इस छापेमारी में भारी मात्रा में नगद, सोने, चांदी और ज्वेलरी के साथ-साथ संपत्ति के दस्तावेज भी बरामद हुए, जो मामले को और मजबूत करने वाले सबूत साबित हुए।

सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, यह मामला दिसंबर 19, 2025 से जुड़ा हुआ है, जब प्रब्धा भंडारी के नेतृत्व में केंद्रीय जीएसटी टीम ने झांसी के जय दुर्गा हार्डवेयर पर छापा मारा था। इस छापे के दौरान ₹13 करोड़ के टैक्स की मांग के संकेत मिले थे और कई कागजात जब्त किए गए थे। इसके बाद एक बैकडोर डील की पेशकश की गई, जिसमें ₹1.5 करोड़ की रिश्वत के बदले इस मामले को “सेटल” करने की बात की गई थी।

सीबीआई ने इस मामले में कुल ₹1.6 करोड़ की नगद राशि, सोने और चांदी के सामान के साथ-साथ संपत्ति के दस्तावेज भी बरामद किए। इसके अलावा, सीबीआई ने मामले में आरोपी रंजीत मंगतानी और उनके वकील नरेश कुमार गुप्ता को भी गिरफ्तार किया है।

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