
चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि जो भक्त इस दिन सच्चे मन से मां की आराधना करता है, उसकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं और कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसलिए इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।
व्रत कथा:
पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच युद्ध चल रहा था, तब भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय ने देवताओं का नेतृत्व किया और तारकासुर नामक राक्षस का वध किया। इस विजय के पीछे मां स्कंदमाता की कृपा और शक्ति मानी जाती है। कहा जाता है कि मां की उपासना करने से संतान सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पूजा विधि:
इस दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और घर के मंदिर में मां स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। उन्हें पीले या सफेद फूल अर्पित करें और धूप-दीप जलाएं। इसके बाद मां को केले का भोग लगाना विशेष फलदायी माना जाता है। पूजा के दौरान “ॐ देवी स्कंदमातायै नमः” मंत्र का जाप करें और मां की आरती करें।
ध्यान रखें कि पूजा के समय मन को शांत रखें और पूरी श्रद्धा के साथ मां का स्मरण करें।
मान्यता है कि मां स्कंदमाता की कृपा से न केवल भौतिक सुख मिलते हैं, बल्कि आत्मिक शांति और मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त होता है।









