चंदना सिन्हा को मिला रेलवे का सबसे बड़ा अवार्ड, इतने हजार बच्चों को अपनी जान पर खेलकर बचाया

जब उन्हें लखनऊ के चारबाग स्टेशन पर एक अकेला बच्चा बैठा होने की सूचना मिली, तो वह बिना समय गंवाए अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचीं.

रेल और उसके प्लेटफॉर्म पर दिनभर भीड़ रहती है. और ये भीड़ ऐसी है जिसके बीच में काफी ज्यादा शोर सुनाई देता है. पर इन सबके बीच में मजबूर लोगों की मदद के लिए कुछ लोग हैं जो अभी भी आगें रहते है…रेलवे प्लेटफॉर्म पर भीड़-भाड़ के बीच एक नजर अक्सर उन खामोश डर को पहचान लेती है जिसे हम अनदेखा कर देते हैं। ये नजरें हैं आरपीएफ (RPF) इंस्पेक्टर चंदना सिन्हा की, जिन्होंने पिछले तीन सालों में उत्तर प्रदेश के रेल नेटवर्क से 1,500 से अधिक बच्चों को तस्करों और अंधेरे भविष्य के चंगुल से बचाया है.इस असाधारण सेवा के लिए उन्हें 9 जनवरी 2026 को दिल्ली में रेलवे के सर्वोच्च सम्मान ‘अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया…

चंदना सिन्हा के लिए यह पुरस्कार न सिर्फ एक उपलब्धि, बल्कि एक जिम्मेदारी है.पुरस्कार ग्रहण करने के तुरंत बाद, जब उन्हें लखनऊ के चारबाग स्टेशन पर एक अकेला बच्चा बैठा होने की सूचना मिली, तो वह बिना समय गंवाए अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचीं.

चंदना ने अपनी टीम के साथ एक विशेष कार्यप्रणाली विकसित की है, जिसमें प्लेटफॉर्म पर सक्रिय निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाती है. उनका नेटवर्क कुलियों, वेंडरों और स्थानीय मुखबिरों से जुड़ा हुआ है जो किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत उन तक पहुंचाते हैं. चंदना की टीम में अधिकांश महिला अधिकारी हैं, जो बच्चों से बात करने और उनका भरोसा जीतने में माहिर हैं.

चंदना ने ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ के तहत 2024 में 494 और 2025 में 1,032 बच्चों को बचाया. इनमें से 152 बच्चों को उन्होंने खुद रेस्क्यू किया. उनका मानना है कि तस्कर बच्चों को काम का लालच देकर बहलाते हैं, लेकिन उनकी टीम बच्चों की आंखों में छिपे डर को पहचानने में माहिर है.

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