चीन का ‘भूमि सीमा कानून’ भारत के लिए चिंता का विषय, प्रभावित होंगे भारत-चीन राजनयिक सम्बन्ध – विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने अपने एक बयान में ड्रैगन के इस चाल को भारत-चीन द्विपक्षीय राजनयिक संबंधों के लिए खतरा बताया है। बुधवार को विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया जिसमें बताया गया है कि चीन का नया कानून जिसका शीर्षक 'भूमि सीमा कानून' है, यह भारत-चीन के मौजूदा द्विपक्षीय समझौतों पर प्रभाव डाल सकता है।

विस्तारवादी चीन की सीमावर्ती इलाकों में अपनी दखल बढ़ाने की कवायद को मजबूत करने वाले उसके ‘भूमि सीमा कानून’ पर भारत के विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान आया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने अपने एक बयान में ड्रैगन के इस चाल को भारत-चीन द्विपक्षीय राजनयिक संबंधों के लिए खतरा बताया है। बुधवार को विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया जिसमें बताया गया है कि चीन का नया कानून जिसका शीर्षक ‘भूमि सीमा कानून’ है, यह भारत-चीन के मौजूदा द्विपक्षीय समझौतों पर प्रभाव डाल सकता है।

दरअसल, दोनों देशों के बीच सीमा समझौता अब तक अनसुलझा रहा है जो लगातार विवाद और तनाव का कारण बना रहता है। ऐसे में महत्वाकांक्षी चीन का यह कानून से भारत सरकार के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता, अरिंदम बागची ने इस पुरे घटनाक्रम पर अपनी चिंता जताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन का मुद्दा विवादस्पद रहा है और चीन का यह नया कानून जो इसे सीमावर्ती इलाकों में अपनी दखल मजबूत बनाने की क्षमता देता है, यह भारत के हित में नहीं लगता है इससे निश्चित रूप से दोनों देशों के राजनैतिक सम्बन्ध प्रभावित होंगे।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने आगे अपने बयान में कहा कि इस तरह के एकतरफा कदम से उन व्यवस्थाओं और समझौतों पर कोई असर नहीं पड़ने वाला जिसपर दोनों देश पहले ही सहमत हो चुके हैं, चाहे वह सीमा सम्बन्धी किसी प्रश्न पर हो या भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में एलएसी पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए। चीन ने यह नया कानून इसलिए बनाया है क्योंकि इस बहाने अगर वह सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिती में एकतरफा बदलाव कर सके तो वह इस आरोप से स्वयं का बचाव कर ले।

आपको बता दें की चीन के इस नए कानून से वह सीमावर्ती इलाकों में अपनी सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक दखल को और मजबूत बनाने की कोशिश कर रहा है। इस कानून के मुताबिक चीन अपने सीमावर्ती इलाकों में मुलभुत सुविधाओं का, तकनिकी तौर पर, और अधिक विकास करने पर विशेष फोकस करेगा। यह सीधे-सीधे भारतीय-चीन सीमा प्रबंधन मामलों पर आघात करने वाला एक कानून स्पष्ट हो रहा है जिसका विरोध भारत कर रहा है।

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