1 फरवरी 2026 से सिगरेट-तंबाकू पर बढ़ेगा टैक्स, सिगरेट कंपनियों के शेयरों में गिरावट

निवेशकों को चिंता है कि बढ़े हुए टैक्स के कारण सिगरेट की बिक्री में कमी आ सकती है और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है।

वित्त मंत्रालय ने 1 फरवरी 2026 से सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क में बड़ा संशोधन करते हुए नई अधिसूचना जारी की है। इस फैसले के तहत सिगरेट की लंबाई और श्रेणी के आधार पर उत्पाद शुल्क में वृद्धि की जाएगी। 1,000 सिगरेट पर 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक का अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। यह बढ़ा हुआ शुल्क मौजूदा 40% जीएसटी के अलावा होगा, जिससे तंबाकू उत्पादों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

जीएसटी मुआवजा उपकर का भी होगा समाप्त

इस नए बदलाव के तहत, 1 फरवरी 2026 से तंबाकू और पान मसाला पर लगने वाला मौजूदा जीएसटी कंपंसेशन सेस भी समाप्त हो जाएगा। यह सेस मूल रूप से राज्यों को जीएसटी लागू होने के बाद हुए रेवेन्यू नुकसान की भरपाई के लिए शुरू किया गया था। इस कदम से तंबाकू उत्पादों की कीमतों में और भी वृद्धि हो सकती है, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।

सिगरेट कंपनियों के शेयरों में गिरावट

केंद्र सरकार द्वारा सिगरेट पर नई एक्साइज ड्यूटी लगाने के फैसले के बाद, सिगरेट कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई है। देश की सबसे बड़ी सिगरेट निर्माता कंपनी ITC के शेयरों में शुरुआती कारोबार के दौरान ही 4% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। सुबह 11 बजे, ITC के शेयर 6.45% की गिरावट के साथ 376.55 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। वहीं, गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयर 10.33% की गिरावट के साथ 2478.30 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। निवेशकों को चिंता है कि बढ़े हुए टैक्स के कारण सिगरेट की बिक्री में कमी आ सकती है और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है।

क्या असर पड़ेगा?

इस बदलाव के चलते, सिगरेट और तंबाकू उत्पादों की कीमतों में वृद्धि तय मानी जा रही है, जो तंबाकू उत्पादों के उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती है। इस फैसले से तंबाकू उद्योग में प्रतिस्पर्धा और कीमतों पर नया प्रभाव पड़ेगा, और इसके असर से सिगरेट कंपनियों को वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

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