सीएम योगी ने अधिकारियों साथ की संचारी रोगों की समीक्षा बैठक, दिए यह निर्देश !

सीएम योगी आदित्यनाथ अपने सरकारी आवास पर उच्चस्तरीय अंतर्विभागीय बैठक कर प्रदेश में संचारी रोगों की स्थिति की समीक्षा की. इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे. आगामी अक्टूबर माह से संचारी रोगों के खिलाफ नवीन चरण प्रारंभ होने को लेकर सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया.

लखनऊ; सीएम योगी आदित्यनाथ अपने सरकारी आवास पर उच्चस्तरीय अंतर्विभागीय बैठक कर प्रदेश में संचारी रोगों की स्थिति की समीक्षा की. इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे. आगामी अक्टूबर माह से संचारी रोगों के खिलाफ नवीन चरण प्रारंभ होने को लेकर सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया. सीएम ने कहा कि इंसेफेलाइटिस नियंत्रण और कोविड प्रबंधन के दो सफल मॉडल हैं, जो संचारी रोग अभियान में हमारे लिए उपयोगी होंगे. आज हर जिले में डेंगू जांच की सुविधा है. 15 नवम्बर तक का समय संचारी रोगों की दृष्टि से हमारे लिए संवेदनशील है.

सीएम ने कहा कि हाल के दिनों में गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर नगर, मेरठ, मुरादाबाद जनपद डेंगू से प्रभावित रहे हैं. बुलंदशहर व संबल में डेंगू आउटब्रेक की स्थिति भी देखी गई. जबकि बरेली, सीतापुर, शाहजहांपुर, हारदोई बदायूं, पीलीभीत और संभल में मलेरिया का असर रहा है. इसी तरह, प्रयागराज, कानपुर नगर, बाराबंकी, कुशीनगर, संत कबीरनगर, सहारनपुर व बस्ती में चिकनगुनिया की दृष्टि से संवेदनशील हैं. इन जिलों में विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है.

सीएम योगी ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में इंसेफेलाइटिस से हजारों बच्चों की मौत होती थी. 50 हजार बच्चों की मौत हुई. 2017 में हमने अंतर्विभागीय समिति बनाई, सभी विभागों ने मिलकर काम किया. अस्पताल बनवाए, पीकू बनवाए, चिकित्सक तैनात किए. साथ-साथ पीने के साफ पानी और शौचालय की व्यवस्था भी कराई. नतीजा इस वर्ष 1 जनवरी से 7 सितंबर तक जापानी इंसेफेलाइटिस, चिकनगुनिया व मलेरिया से एक भी मृत्यु नहीं हुई है. आगे भी इस बीमारी से बच्चों की मौत ना हो इसको लेकर सीएम ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.

सीएम योगी ने अधिकारियों को दिए निर्देश….

  • कहीं भी हॉटस्पॉट की स्थिति न बनने पाए। यदि कहीं भी ऐसी स्थिति हो तो वहां संबंधित नगर आयुक्त/अधिशाषी अधिकारी स्वयं पहुंच कर निरीक्षण करें.
  • सभी सरकारी व निजी अस्पतालों/मेडिकल कॉलेजों में नए रोगियों की नियमित रिपोर्टिंग जरूर हो. प्रदेश के सभी पीएचसी/सीएचसी/जिला अस्पतालों/मेडिकल कॉलेजों के लिए जिलाधिकारी द्वारा एक-एक नोडल अधिकारी नामित किया जाए.
  • पीएचसी/सीएचसी व अन्य अस्पतालों में तैनात पैरामेडिक्स नियमित रूप से अपनी सेवाएं जरूर दें.
  • जिलों में आउटब्रेक्स की स्थिति पर नियंत्रण हेतु ठोस प्रयास किये जाने आवश्यक है. नगर विकास, ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग मच्छरों पर प्रभावी नियंत्रण हेतु फॉगिंग एवं लार्वीसाइडल स्प्रे कराई जाए.
  • शिक्षा विभाग द्वारा जनपद के समस्त विद्यालयों में नोडल अध्यापकों के माध्यम से विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का संचारी रोगों के विषय में संवेदीकरण कराया जाए.
  • पशुपालन विभाग द्वारा सभी पशु बाड़ों की नियमित सफाई कराई जाए. पशुओं के पीने हेतु प्रयोग किए जाने वाले पात्रो के पानी में मच्छरों के प्रजनन की संभावना को समाप्त करने हेतु नियमित रूप से इस पानी को बदलना की कार्यवाही आवश्यक है.
  • चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, मेडिकल एजुकेशन, ग्राम्य विकास, नगर विकास, महिला बाल विकास, कृषि, बेसिक माध्यमिक शिक्षा द्वारा अंतर्विभागीय समन्वय के साथ स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा का ठोस प्रयास किया जाए.
  • रोगियों के आवागमन के लिए एम्बुलेंस की पर्याप्त उपलब्धता रहे.
  • त्वरित आउटब्रेक रिस्पॉन्स के लिए डिजीज सर्विलांस डेटा तंत्र का सुदृढ़ीकरण किया जाए.
  • बरसात के दृष्टिगत नालों की सफाई करा ली जाए. सिल्ट जमा न हो, ताकि बारिश में जलभराव न हो। मलिन बस्तियों में साफ-सफाई की अत्यधिक आवश्यकता है. यहां नियमित फॉगिंग भी कराई जाए.
  • शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित हो. लोगों के सामने क्लोरीनेशन डेमो दिया जाए. पानी उबाल कर छान कर पीने की जानकारी दें. क्लोरीन की गोलियां वितरित की जाएं.

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