कांग्रेस पार्टी 28 दिसम्बर को मनाएगी अपना 137वां स्थापना दिवस, दिल्ली में होगा बड़ा कार्यक्रम…

रिपोर्ट- रवि सर्राफ

2014 और 19 में लोकसभा चुनाव में बुरी पटखनी खाने वाली कांग्रेस अब 2024 के लिए नए सिरे से कमर कस रही है। धरना, प्रदर्शन और आंदोलन के ज़रिए पार्टी अब मोदी सरकार से दो-दो हाथ करने के मूड में है।इसके लिए पार्टी ने महंगाई को लेकर बड़े अभियान और जयपुर की रैली के बाद अब दूसरे चरण में बेरोज़गारी और सरकारी कम्पनियों के निजीकरण के मुद्दे पर हल्ला बोल करेगी।

दरअसल, दिग्विजय सिंह की अगुवाई वाली पार्टी की आंदोलन और धरना प्रदर्शन समिति इसकी रूप रेखा तैयार कर रही है। इस समिति में प्रियंका गांधी वाड्रा और रागिनी नायक समेत कुल नौ सदस्य हैं। इसके तहत पार्टी देशभर में पार्टी अपना पक्ष जन जन तक पहुंचाने के लिए बड़ा ट्रेनिंग अभियान शुरू कर चुकी है। पार्टी का लक्ष्य प्रदेश स्तर से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक देश में करीब 5500 ट्रेनर तैयार करने का है, जो बतौर नुक्कड़ प्रवक्ता चाय की दुकानों और अन्य जगहों पर समाज में होने बहस या चर्चा में पार्टी का पक्ष रखने वालों को तैयार कर सकें। ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स की ये मुहिम नवम्बर में वर्धा से शुरू की गयी है। जहां 5 दिन का शिविर लगाया गया, पहले 4 दिन हर राज्य से 3 से 5 ट्रेनर्स को कांग्रेस के इतिहास की ट्रेनिंग दी गयी और 5वें दिन ज्वलन्त मुद्दे जैसे महंगाई पर पार्टी का रुख , जनता से सरोकार, मोदी सरकार की नाकामियों का पाठ पढ़ाया गया।

इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत दूसरे चरण में पार्टी बेरोजगारी और सरकारी कम्पनियों के निजीकरण के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है। इसके लिए ट्रेनिंग ले चुके सदस्यों को शिविर या वर्चुअल तरीके से एक दिन फिर ट्रेनिंग दी जाएगी। आने वाले समय में ये मास्टर ट्रेनर्स देश भर में पार्टी का वो कैडर तैयार करेंगे जो जगह जगह पार्टी का पक्ष और जनता से जुड़े मुद्दे मोदी सरकार की नाकामयाबी के साथ रख सकें।

जात पर न पात बटन दबेगा हाथ पर का नारा लगाने वाली पार्टी सामाजिक ताने बाने में जाति की भूमिका पर भी नज़र गड़ाए है, इसलिए वो। बेरोज़गारी और सरकारी कम्पनियों के निजीकरण के मुद्दे को आरक्षण से भी जोड़ेगी। पार्टी आमजन को ये समझाने की कोशिश करेगी कि, इस कदम से सरकारी नौकरियां घटेंगी, निजीकरण होगा तो आरक्षण का लाभ भी खत्म होगा।

ट्रेनिंग के इस कार्यक्रम को 2024 तक पार्टी लगातार चालू रखेगी। इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी शामिल किया जा रहा है। जनजागरण अभियान के साथ ही जनता और मीडिया का ध्यान खींचने के लिए बैलगाड़ी पर निकलना, ट्रैक्टर यात्रा जैसे कार्यक्रम भी शामिल किए जा रहे हैं। पार्टी इस अभियान को लेकर इतनी गम्भीर है कि, खुद राहुल गांधी ने वर्धा के शिविर को वर्चुअली सम्बोधित किया था।

आम जनमानस में पटेल-नेहरू विवाद से लेकर सावरकर से जुड़े तमाम तथ्यों को भी जनता के बीच ले जाने की तैयारी है, जिससे पार्टी को लगता है कि, वो सामाजिक विमर्श में मोदी सरकार और संघ को घेर पाएगी। इसके लिए वो आम भाषा में पर्चे छपवाकर विमर्श को आमजनता से जोड़ने की कोशिश भी करेगी। साथ ही जनता को जोड़ने के लिए मिस्ड काल नम्बर भी देगी।इस ट्रेनिंग में पार्टी के नेताओं के साथ ही आज़ाद थिंकर्स का भी आने वाले वक्त में सहारा लिया जाएगा। राम पुन्नानी, आदित्य मुखर्जी जैसे इतिहासकारों से भी इस बावत सम्पर्क साधा गया है।

ऐसे ही एक शिविर में दिग्विजय सिंह ने कहा कि, सावरकर ने खुद अपनी किताब में लिखा कि, हिन्दू और हिंदुत्व अलग अलग हैं। गाय जो इतनी कम बुद्धि की है कि, अपने मल में लोटती है, वो कहाँ से माता हो गयी। जरूरत पड़ने पर गोमांस खाने में भी कोई बुराई नहीं है। इसलिए आप लोग बीजेपी नेताओं से ये सवाल करियेगा क्योंकि, मेरी तरह आम हिन्दू को गोहत्या के खिलाफ है।

बेरोजगारी के सवाल को युवाओं के बीच ले जाकर पार्टी खुद की उपलब्धियां बताते हुए ये खास तौर पर बताएगी कि, जिन सरकारी कम्पनियों को बेचा जा रहा है उनको इतिहास में कांग्रेस की सरकारों ने खड़ा किया था और बेरोज़गारी की वजह कोरोना नहीं मोदी सरकार की नीतियां है वरना 2018 में ही 45 सालों में बेरोजगारी सबसे ज़्यादा ना हो गयी होती। आम जनता के बीच अभियान चलाने के बाद इस मुद्दे पर एक बड़ी रैली का आयोजन होगा। इस तरह जनता से जुड़े नए नए मुद्दों से जोड़कर 2024 तक पार्टी ये सिलसिला बनाये रखेगी .

कुल मिलाकर देश की सबसे पुरानी पार्टी लगातार दो आम चुनावों में मोदी से पिटने के बाद नए सिरे से 2024 की इबारत लिखना चाहती है। उसी के तहत वो संगठन में कैडर बनाकर आमजनता के बीच पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। लेकिन कांग्रेस की इस रणनीति पर कई सवाल सामने हैं, जैसे क्या वो ट्रेनिंग के ज़रिए अपने कैडर को कुछ यूं तैयार करना चाहती है जो उसकी रटी रटाई बातों को रटटू तोते की तरह जनता के बीच बयां कर दे। क्या पार्टी की ये कवायद आम जनता के बीच वाकई मोदी की छवि पर चोट कर पायेगी और क्या मोदी के नेतृत्व के सामने पार्टी का कैडर अपने नेतृत्व को मजबूती से जनता के सामने रख पायेगा? आखिर ये तो तब ही तय होगा जब जनता चुनाव में अपने वोट का इस्तेमाल करेगी।

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