
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से लोगों का काफी ज्यादा बुरा हाल है….इस मामले में अब सरकार पर भी सवाल खड़े किए जा रहे है….बड़ी संख्या में लोग अब भी अस्पतालों में भर्ती किए जा रहे है….
जानकारी के लिए बता दें कि भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने के कारण अब तक 13 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 1100 से ज्यादा लोग बीमार हैं। इस क्षेत्र में हालात सामान्य होने से बहुत दूर हैं। 120 से अधिक मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। इस मामले में स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि डेढ़ से दो साल से नाली की लाइन पीने के पानी से जुड़ी हुई है, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
दूषित पानी पीने से पहली मौत 26 दिसंबर को हुई थी। सोमवार तक 100 से अधिक लोग बीमार हो गए थे, और मंगलवार तक मृतकों की संख्या 8 तक पहुंच गई थी। बुधवार को चार और मौतें होने के बाद यह संख्या 13 हो गई। बीमार लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और अब भी कई लोग गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर आयुक्त और जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। इंदौर में चर्चा है कि कैलाश विजयवर्गीय के प्रभुत्व के कारण मुख्यमंत्री मोहन यादव कोई बड़ा एक्शन लेने में हिचकिचा रहे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन के निष्क्रियता की वजह से इस तरह की घटनाएं हो रही हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बुधवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दायर की गईं। कोर्ट ने शासन से पीड़ितों का निश्शुल्क उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं और स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। नगर निगम के दो अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जबकि एक अधिकारी को बर्खास्त कर दिया गया है।
दूषित पानी पीने से इलाके में भय और गुस्सा फैल गया है। कई लोग यह आरोप लगा रहे हैं कि जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की और अब जब मामला बढ़ गया है, तब उन्होंने अस्थायी रूप से कुछ कदम उठाए हैं। इंदौर, जो देश का स्वच्छतम शहर माना जाता है, आज इस तरह की घटना से शर्मसार हो गया है।









