Uttarakhand में बना देश का पहला पब्लिक हेल्थ गार्डन, 240 औषधि पौधों का किया गया संरक्षित

उत्तराखंड वन अनुसंधान केंद्र जैव विविधता के क्षेत्र में कई उपलब्धियों के लिए देश दुनिया में पहचान बना चुका है। इसी के तहत अनुसंधान केंद्र ने लालकुआं वन अनुसंधान केंद्र में देश का पहला (जन स्वास्थ्य वाटिका) पब्लिक हेल्थ गार्डन तैयार किया है।

रिपोर्ट-दिनेश पाण्डेय

हल्द्वानी. उत्तराखंड वन अनुसंधान केंद्र जैव विविधता के क्षेत्र में कई उपलब्धियों के लिए देश दुनिया में पहचान बना चुका है। इसी के तहत अनुसंधान केंद्र ने लालकुआं वन अनुसंधान केंद्र में देश का पहला (जन स्वास्थ्य वाटिका) पब्लिक हेल्थ गार्डन तैयार किया है। जहां 240 से अधिक संरक्षित और विलुप्त प्रजातियों के औषधीय पौधों को संरक्षित करने का काम किया है।

यही नहीं इस वाटिका में जन स्वास्थ्य से जुड़े औषधि पौधों के बारे में भी लोगों को जानकारी दी जा रही है। जिससे लोग इन पौधों के माध्यम से अपने स्वास्थ्य को ठीक कर सके। वही वाटिका में आयुर्वेद के जनक महर्षि चरक की भी मूर्तियां स्थापित की गई है जिससे कि लोग आयुर्वेद की प्रेरणा ले सके।

वन अनुसंधान केंद्र के प्रभारी मदन सिंह बिष्ट ने बताया कि जायका योजना के तहत लालकुआं नर्सरी में करीब 3 हेक्टेयर में पब्लिक हेल्थ गार्डन किया स्थापना की गई है। इसका मकसद है कि लोगों को आयुर्वेद के बारे में अधिक से अधिक जानकारी दी जाए उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में औषधि पेड़ पौधों का बड़ा ही अपना महत्व है जहां 240 से अधिक विलुप्त प्रजातियों के पेड़ पौधों को संरक्षित करने का काम किया है जो औषधि से भरपूर है।

पब्लिक हेल्थ गार्डन देश का पहला ऐसा वाटिका है जहां एक साथ इतने प्रजातियों के पेड़ पौधों को एक साथ संरक्षित करने और उनके बारे में लोगों को जानकारी देने का काम किया गया है। उन्होंने बताया कि कौन सी बीमारी में कौन से पौधों का अपना महत्व है इसके बारे में जानकारी दी गई है। शरीर के विभिन्न अंगों को स्वस्थ रखने के लिए कौन सी औषधि पौधों की आवश्यकता पड़ती है इसकी भी जानकारी दी गई है।

उन्होंने बताया कि और अनुसंधान केंद्र के इस वाटिका में, हरसिंगार, पारिजात, हड़जोड़, मेदा, लेमन ग्रास, आंवला ,अर्जुन, वज्रदंती, भृंगराज,चिरायता, गोरखू, धृत कुमारी, कासनी, दंबेल, ब्राम्ही, सहित 240 से अधिक प्रजातियों के पौधे को संरक्षित करने का काम किया गया है।

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