
अमेरिका द्वारा ईरान के साथ दो सप्ताह के सीजफायर की घोषणा के बाद वैश्विक कच्चे तेल के बाजारों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, बीते सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में 13 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली, जो वर्ष 2020 के बाद यानी पिछले 6 वर्षों में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है।
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें गिरकर करीब 95 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर बना हुआ है। फरवरी के अंत में मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद से तेल बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हालांकि, मौजूदा गिरावट के बावजूद कीमतें अभी भी युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत अधिक बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि हाल ही में घोषित सीजफायर कितना टिकाऊ साबित होता है और क्या क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में कोई ठोस प्रगति होती है। यदि स्थिति स्थिर होती है तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है, खासकर ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण जलमार्ग से होने वाले तेल परिवहन पर।
फिलहाल इस रणनीतिक जलमार्ग से होने वाला आवागमन मुख्य रूप से ईरान से जुड़े जहाजों तक ही सीमित बताया जा रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।









