समीर वानखेड़े के खिलाफ दलित संगठनों ने आरक्षण का गलत तरीके से लाभ लेने का लगाया आरोप

स्वाभिमानी रिपब्लिकन पार्टी और भीम आर्मी ने आरोप लगाया है कि वानखेड़े ने सरकारी नौकरी पाने के लिए अनुसूचित जाति श्रेणी के तहत अपनी झूठी जाति दिखाकर आरक्षण का गलत तरीके से लाभ लिया है। इस मामले में दोनों दलित संगठनों ने अपनी शिकायत भी दर्ज कराई है।

दो दलित संगठनों ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि वानखेड़े ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र दिखाकर सरकारी नौकरी हांसिल की है। समीर वानखेड़े द्वारा कथित रूप से किये गए धोखाधड़ी मामले में स्वाभिमानी रिपब्लिकन पार्टी और भीम आर्मी ने आरोप लगाया कि वानखेड़े ने सरकारी नौकरी पाने के लिए अनुसूचित जाति श्रेणी के तहत अपनी झूठी जाति दिखायी थी।

दरअसल, कुछ दिन पहले राकांपा (NCP) नेता नवाब मलिक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, कहा था, “मैं पहले यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं समीर दाऊद वानखेड़े के बारे में जो मुद्दा उजागर कर रहा हूं वह उसके धर्म के बारे में नहीं है। मैं धोखाधड़ी के तरीकों को सामने लाना चाहता हूं। जिससे उसने आईआरएस की नौकरी पाने के लिए जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया और एक योग्य अनुसूचित जाति के व्यक्ति को उसके भविष्य से वंचित कर दिया।” इसके बाद इन दोनों दलित संगठनों की शिकायतों से मामले का तूल पकड़ना स्वाभाविक है।

एक ट्वीट में, नवाब मलिक ने वानखेड़े के जन्म प्रमाण पत्र की एक प्रति भी साझा की थी, जिसमें दावा किया गया था कि वह अनुसूचित जाति (एससी) श्रेणी में भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) में शामिल होने के लिए अपात्र हैं क्योंकि वानखेड़े जन्म से मुस्लिम हैं। मलिक ने आरोप लगाया था कि समीर वानखेड़े के पिता एक परिवर्तित मुसलमान थे। वानखेड़े ने केंद्रीय सिविल सेवा परीक्षा में चयनित होने के लिए आरक्षित श्रेणी के तहत मिलने वाली छूट को प्राप्त करने के लिए अपने पिता के नाम को सही कराया था।

समीर वानखेड़े के जन्म प्रमाण पत्र में धर्म के स्थान पर “मुस्लिम” लिखा है जबकि उनके पिता का नाम “दाऊद के वानखेड़े” लिखा है। नवाब मलिक का तर्क है कि कानून के अनुसार, जो दलित इस्लाम में परिवर्तित होते हैं, वे आरक्षण का लाभ नहीं उठा सकते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि मलिक स्वीकार करते हैं कि समीर वानखेड़े के पिता ज्ञानदेव वानखेड़े का जन्म महाराष्ट्र के पूर्व वाशिम जिले में एक दलित परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने मुंबई में एक मुस्लिम महिला से इस्लाम धर्म अपनाकर शादी कर ली और दाऊद नाम स्वीकार कर लिया। राकांपा नेता का आरोप है कि ज्ञानदेव वानखेड़े ने बाद में अपने दो बच्चों के लिए आरक्षण का लाभ सुनिश्चित करने के लिए अपने जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया।

आरोपों का जवाब देते हुए समीर वानखेड़े ने कहा था कि उनके पिता का नाम “ज्ञानदेव” है न कि “दाऊद”। उन्होंने एक बयान भी जारी कर कहा कि वह एक “बहु-धार्मिक, धर्मनिरपेक्ष” परिवार से ताल्लुक रखते हैं। बयान में कहा गया, “मेरे पिता एक हिंदू हैं और मेरी मां एक मुस्लिम थीं।” समीर वानखेड़े ने तब से अपने दावों के समर्थन में अपने पिता का जाति प्रमाण पत्र प्रसारित किया है।

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