
दावोस, स्विट्जरलैंड वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ते कर्ज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नए जोखिमों से जूझ रही है। ऐसे में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की 56वीं वार्षिक बैठक (19-23 जनवरी 2026) में भारत एक मजबूत ‘सिस्टमिक पावर’ के रूप में उभर रहा है। थीम ‘A Spirit of Dialogue’ के तहत यह मंच अब जियो-इकोनॉमिक्स का केंद्र बन चुका है, जहां भारत न केवल अपनी विकास गाथा बता रहा है, बल्कि नई विश्व व्यवस्था में निर्णायक भूमिका निभा रहा है।

WEF के अनुसार, दावोस में 130 से अधिक देशों के करीब 3,000 प्रतिनिधि जुटे हैं, जिनमें 65 राष्ट्राध्यक्ष, 400 से ज्यादा शीर्ष राजनीतिक नेता और 850 से अधिक वैश्विक सीईओ शामिल हैं। भारत का प्रतिनिधिमंडल अब तक का सबसे बड़ा और प्रभावशाली है, जिसमें केंद्र सरकार के मंत्री, 10 राज्यों के प्रतिनिधि और प्रमुख उद्योगपति शामिल हैं।
दावोस में WEF 2026 की बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी विशेष रूप से शामिल होंगी। उनका योगदान और विचार वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को और मजबूत करेंगे। उनकी उपस्थिति भारत के प्रभाव को और बढ़ाएगी।
इस बार की सबसे बड़ी खासियत है 10 राज्यों की एकजुट उपस्थिति. महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, आंध्र प्रदेश, असम, झारखंड, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और केरल। ये राज्य अलग-अलग राजनीतिक दलों के शासन में हैं, लेकिन एक मंच पर निवेशकों को आकर्षित करने उतरे हैं। यह भारत के संघीय ढांचे की ताकत का जीवंत प्रदर्शन है।

उत्तर प्रदेश की भागीदारी विशेष रूप से चर्चा में है। इंवेस्ट यूपी के अधिकारी यहां मेगा प्रोजेक्ट्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और स्किल डेवलपमेंट पर फोकस कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियां और तेज आर्थिक वृद्धि वैश्विक कंपनियों को लुभा रही हैं, जो भारत की समग्र ग्रोथ स्टोरी को मजबूती देती हैं। अन्य राज्यों में असम (पिछले 5 वर्षों में 45% विकास दर) और झारखंड (‘Growth in Harmony with Nature’ थीम के साथ पहली बार) भी अपनी क्षमताएं पेश कर रहे हैं।

इंडिया पवेलियन दावोस के इतिहास में सबसे बड़ा है. प्रोमेनाड पर प्रमुख स्थान पर 10,000 वर्ग फुट का यह स्पेस अब प्रदर्शनी नहीं, बल्कि डील-मेकिंग हब है। यहां राज्य सरकारें, वैश्विक कंपनियां और निवेशक दिन-रात बैठकें कर रहे हैं। फोकस क्षेत्र: मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, एनर्जी ट्रांजिशन, सप्लाई चेन, स्किल डेवलपमेंट और राज्य-स्तरीय परियोजनाएं। आंध्र प्रदेश का अलग पवेलियन भी भारत की मौजूदगी को मजबूत कर रहा है।
केंद्र सरकार की ओर से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और औद्योगिक नीतियों पर मजबूत प्रस्तुति दी जा रही है। कॉरपोरेट इंडिया में टाटा, रिलायंस, इंफोसिस, विप्रो, HCL जैसी कंपनियां AI, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर वैश्विक संवाद का हिस्सा हैं।

भारत समाचार दावोस से WEF का लाइव कवरेज प्रदान करेगा। एडिटर इन चीफ ब्रजेश मिश्रा स्विट्जरलैंड से सीधे लाइव डिबेट होस्ट करेंगे, जहां भारत और उत्तर प्रदेश की हर गतिविधि, बैठकें और घोषणाएं दर्शकों तक पहुंचेंगी।
दावोस 2026 में भारत अपनी स्थिति मजबूत करने, साझेदारियां गढ़ने और भविष्य की अर्थव्यवस्था में लीडरशिप लेने आया है। उत्तर प्रदेश की सक्रियता इस मिशन को नई ऊर्जा दे रही है। इस बार भारत और उत्तर प्रदेश सिर्फ नजर नहीं आएंगे. उनकी आवाज दुनिया भर में गूंजेगी।
भारत की ओर से मुख्य रूप से निम्नलिखित केंद्रीय मंत्री भाग ले रहे हैं:
अश्विनी वैष्णव (रेल, सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री)
शिवराज सिंह चौहान (कृषि और किसान कल्याण मंत्री)
प्रल्हाद जोशी (नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री)
किंजराप्पु राम मोहन नायडू (नागरिक उड्डयन मंत्री)
इसके अलावा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी उपस्थित रहेंगे।
मुख्यमंत्रियों और राज्य प्रतिनिधियों की सूची
इस बार 10 राज्यों की रिकॉर्ड उपस्थिति है, जिसमें से कई मुख्यमंत्रियों ने व्यक्तिगत रूप से भाग लिया है
महाराष्ट्र: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
आंध्र प्रदेश: मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू
असम: मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा
मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री मोहन यादव
तेलंगाना: मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी
झारखंड: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
अन्य राज्यों के प्रतिनिधि:
कर्नाटक: उप-मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार
गुजरात: उप-मुख्यमंत्री हर्ष रमेशभाई संघवी
उत्तर प्रदेश: उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल









