
नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने गुरुवार को मशहूर एक्टर लीना मारिया पॉल और उनके साथ अन्य आरोपियों की Rs 200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग और रंगदारी मामले में लंबित ज़मानत याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। जस्टिस शर्मा ने कहा, “मैं इन अर्जियों पर सुनवाई नहीं करूंगा। कल इसे इंचार्ज जज की बेंच के सामने लिस्ट करें।”
इससे पहले, जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने भी इन याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। इन याचिकाओं की सुनवाई अब तक जस्टिस सौरभ बनर्जी कर रहे थे। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 3 हफ़्ते के भीतर फैसला करने का निर्देश दिया था, लेकिन मामले की सुनवाई 2024 से पेंडिंग थी।
बता दें, लीना मारिया पॉल और उनके साथियों की याचिकाएं, जिसमें वह महिला आरोपियों से जुड़ी कस्टडी और PMLA के तहत बेल के लिए अर्जी दे रहे थे, 2024 में दायर की गई थी। लीना, जिनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और एक्सटॉर्शन का केस चल रहा है, पिछले 3 साल 7 महीने से कस्टडी में हैं, और उन्हें अब तक चार्ज फ्रेम नहीं हुआ है।
वहीं, याचिकाकर्ता की तरफ से वकील अनंत मलिक ने अदालत में यह दलील दी कि उनकी क्लाइंट, लीना मारिया पॉल और उनके जैसे अन्य आरोपियों को बेल दी जानी चाहिए, क्योंकि आरोपों पर बहस अभी भी जारी है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जैसे जैकलीन फर्नांडीज को बेल दी गई थी, वैसे ही लीना को भी बेल दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लीना की भूमिका फर्नांडीज जैसी ही है।
एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने लीना की बेल याचिका का विरोध करते हुए कहा कि PMLA की धारा 45(2) के तहत महिला आरोपी पर विशेष शर्त लागू नहीं होती है। ED ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि बेल याचिका पर विचार करते समय आरोपी का कंडक्ट और अन्य शर्तें ध्यान में रखी जाएं।
हालांकि, अब तक किसी भी आरोपी को इस मामले में बेल नहीं मिली है, और सुनवाई जारी है। लीना मारिया पॉल और उनके साथियों की बेल याचिका पर जल्द ही नई तारीख तय की जाएगी।








