
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के ऐलान के बाद दिल्ली पुलिस ने व्यापक इंतजाम किए हैं। प्रदर्शन को आम आदमी पार्टी, लेफ्ट और ममता बनर्जी की पार्टी का समर्थन मिलने की बात कही गई है। CJP ने SIR को रद्द करने, कथित तौर पर मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामले में जवाबदेही तय करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई है।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। वहीं, आयोजकों ने साफ किया है कि उन्हें जहां रोका जाएगा, वहीं विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस बीच सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैरिकेडिंग, परिवहन प्रतिबंध और हिरासत में लेने के इंतजाम किए गए हैं। प्रदर्शन के मद्देनजर आम लोगों को होने वाली परेशानी का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में भी उठा, जहां अदालत ने नागरिकों की सुविधाओं को लेकर कई अहम टिप्पणियां कीं।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान, सुबह 10 बजे पहुंचने की अपील
CJP ने समर्थकों से सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके अपने सहयोगियों सौरभ दास, आशुतोष रांका और अन्य समर्थकों के साथ सुबह 9:30 बजे एयरपोर्ट पहुंचेंगे। इसके बाद जंतर-मंतर जाने की कोशिश किए जाने की बात कही गई है।
CJP की प्रमुख मांगों में SIR प्रक्रिया को रद्द करना, मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने के लिए जिम्मेदारी तय करना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा शामिल है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।
‘जिम्मेदारी उठाओ उसे बदलने की’, अभिजीत दीपके का संदेश
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि उन्हें जहां रोका जाएगा, वही जंतर-मंतर होगा। उन्होंने प्रदर्शन करने की बात दोहराते हुए जेल जाने के लिए भी तैयार होने का दावा किया है।
दीपके ने सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ”जिंदगी जीने के दो ही तरीके होते हैं…एक जो हो रहा है, होने दो, बर्दाश्त करते जाओ…या फिर जिम्मेदारी उठाओ उसे बदलने की.”
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 23 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 23 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर कई स्तरों की बैरिकेडिंग की गई है।
जनपथ, कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर रोड पर तीन से चार स्तरों की बैरिकेडिंग की गई है। संसद मार्ग की तरफ जाने वाली सड़क का एक हिस्सा बंद किए जाने और वहां जाने वाले पैदल यात्रियों को वापस भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है।
पुलिस अधिकारियों की वर्दी पर बॉडी कैमरे लगाए गए हैं। जंतर-मंतर पर केवल मीडिया को प्रवेश की अनुमति दिए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा रैपिड एक्शन फोर्स की गाड़ियां और निजी बसें भी तैनात की गई हैं, ताकि प्रदर्शनकारियों के पहुंचने की स्थिति में उन्हें हिरासत में लिया जा सके।
ट्रेनें रद्द, मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदी; इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित
CJP के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में परिवहन और सार्वजनिक सेवाओं पर भी असर पड़ने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आने वाली कुछ स्पेशल और मेल ट्रेनों को रद्द किया गया है। दोपहर 2 बजे तक 75 ट्रेनों के रद्द रहने की जानकारी दी गई है।
इसके अलावा 45 मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद किए जाने का दावा किया गया है। दिल्ली में शराब की दुकानों को बंद रखने का आदेश दिए जाने और 10 डिटेंशन सेंटर बनाए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
नई दिल्ली जिले में जंतर-मंतर के आसपास चार किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने की बात भी कही गई है। इन प्रतिबंधों के कारण आम लोगों की आवाजाही और दैनिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है।
दिल्ली पुलिस ने CJP को प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी?
दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने के पीछे कई कारण बताए गए हैं। इनमें आवेदन में देरी और नई दिल्ली जिले में लागू निषेधाज्ञा प्रमुख हैं।
- प्रदर्शन के लिए देरी से आवेदन किया जाना।
- निर्धारित समय से 10 दिन पहले आवेदन देने की जरूरत।
- 7 अक्टूबर को आवेदन दिए जाने की जानकारी।
- नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू होने का हवाला।
- प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की चेतावनी।
पुलिस की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर उठाए गए कदमों के बीच प्रदर्शन की अनुमति को लेकर विवाद बना हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट में उठा आम लोगों की परेशानी का मुद्दा
CJP के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस की ओर से किए गए एहतियाती इंतजामों और आम लोगों को हो रही परेशानी का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में भी उठा। अदालत में दलील दी गई कि केवल आशंका के आधार पर परिवहन और सार्वजनिक सुविधाओं पर व्यापक प्रतिबंध नहीं लगाए जाने चाहिए।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि 20 जून को प्रदर्शन की अनुमति मांगी गई थी और पुलिस ने मंजूरी दी थी, लेकिन प्रदर्शनकारी एक दिन की अनुमति लेकर 17 दिनों तक बैठे रहे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर जाने की कोशिश की थी और उन्हें रोकने के दौरान 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंधों की व्यापकता और आम नागरिकों की सुविधाओं को लेकर कई अहम टिप्पणियां कीं।
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां क्या रहीं?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी समस्या से निपटने के लिए जरूरत से ज्यादा कठोर कदम नहीं उठाए जाने चाहिए। अदालत की टिप्पणियों में नागरिकों के अधिकारों और सार्वजनिक परिवहन की सुविधा पर विशेष जोर रहा।
- मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
- नागरिकों को सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने का अधिकार है।
- मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों पर रोक लगाने के फैसले पर दोबारा विचार करने की जरूरत है।
- आम लोगों को अनावश्यक असुविधा नहीं होनी चाहिए।
- प्रदर्शन के लिए किसी बड़े स्थान की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।
इन टिप्पणियों के जरिए अदालत ने सुरक्षा व्यवस्था और नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
नोएडा में भी सख्ती, 20 अक्टूबर तक धारा 163 लागू
दिल्ली में प्रदर्शन के बीच नोएडा और गौतमबुद्धनगर में भी धरना-प्रदर्शन तथा भीड़ जुटाने को लेकर सख्ती की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गौतमबुद्धनगर में 20 अक्टूबर तक धारा 163 लागू की गई है।
नवरात्र, परीक्षाओं और किसान संगठनों की ओर से संभावित धरना-प्रदर्शन को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। आदेश के तहत बिना अनुमति एक स्थान पर पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई गई है।
चिल्ला बॉर्डर पर बैरिकेडिंग, दिल्ली जाने वाले प्रदर्शनकारियों पर नजर
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले दिल्ली-नोएडा के चिल्ला बॉर्डर पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। एहतियातन बैरिकेडिंग की गई है, ताकि उत्तर प्रदेश की ओर से प्रदर्शनकारियों का बड़ा समूह दिल्ली की तरफ बढ़ने पर उसे बॉर्डर पर ही रोका जा सके।
दिल्ली पुलिस पहले से ही जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर रही है। ऐसे में CJP के प्रदर्शन, पुलिस की कार्रवाई और आम लोगों की आवाजाही पर पड़ने वाले असर को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है।









