
भारत में मांसाहार प्रेमियों के बीच लंबे समय तक मटन का मतलब बकरे का मांस ही माना जाता रहा है, लेकिन हालिया आंकड़े एक नया ट्रेंड दिखा रहे हैं। पिछले एक दशक में भारतीय बाजार में भेड़ के मीट की मांग 250% से ज्यादा बढ़ गई है। देश के कई राज्यों—जैसे आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में अब बिक्री के मामले में भेड़ का मीट बकरे को टक्कर दे रहा है।
फूड एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह स्वाद और फैट कंटेंट है। भेड़ के मांस में प्राकृतिक रूप से फैट की मात्रा थोड़ी ज्यादा होती है, जो पकने के दौरान पिघलकर मीट को ज्यादा रसीला बना देती है। यही कारण है कि बिरयानी बनाने के लिए भेड़ का मीट अब कई शेफ और खाने के शौकीनों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
भारत में वैसे तो सबसे ज्यादा खाया जाने वाला नॉनवेज चिकन है, क्योंकि यह सस्ता और आसानी से उपलब्ध होता है। लेकिन जब रेड मीट की बात आती है तो परंपरागत रूप से लोग बकरे के मटन को प्राथमिकता देते रहे हैं। अब धीरे-धीरे भेड़ के मांस की लोकप्रियता भी बढ़ रही है।
बकरे का मीट
बकरे का मांस लीन मीट की श्रेणी में आता है। इसमें कोलेस्ट्रॉल और सैचुरेटेड फैट की मात्रा भेड़ के मुकाबले कम होती है। इसलिए जो लोग वजन नियंत्रित रखना चाहते हैं या दिल की सेहत का ध्यान रखते हैं, उनके लिए बकरे का मांस बेहतर विकल्प माना जाता है। इसमें आयरन और पोटेशियम की मात्रा भी अच्छी होती है।
भेड़ का मीट
ताकत और ऊर्जा के मामले में भेड़ का मीट आगे माना जाता है। इसमें कैलोरी, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन B12 और जिंक अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। यही कारण है कि इसे मसल बिल्डिंग और शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों तरह के मांस के अपने-अपने पोषण लाभ हैं। जहां बकरे का मांस हल्का और हेल्थ फ्रेंडली माना जाता है, वहीं भेड़ का मांस स्वाद और ऊर्जा के लिहाज से ज्यादा समृद्ध होता है। इसी वजह से खासकर बिरयानी और पारंपरिक व्यंजनों में भेड़ के मांस की लोकप्रियता तेजी से बढ़ती जा रही है।









