
प्रदेश में आए दिन वनों में आग लगने की घटनाएं निकल कर सामने आ रही हैं। इस वर्ष उत्तराखंड के लगभग 329 हेक्टर जंगल आग से प्रभावित हुए हैं। वन विभाग की माने तो 250 के आस पास मामले वनाअग्नि के निकल कर सामने आ चुके हैं।
आपको बता दें वनाअग्नि के कई कारण हो सकते हैं लेकिन वन विभाग उन शरारती तत्वों पर अपनी पैनी निगाह बनाए हुए है। जिनकी वजह से अक्सर जंगलों में भीषण आग लग जाती है। हालांकि अब तक कोई ऐसा मामला संज्ञान में नहीं आया है जिस मे किसी शरारती तत्व द्वारा आगजनी की घटना को अंजाम दिया गया हो। आईएफएस निशांत वर्मा का कहना है कि यदि कोई ऐसा व्यक्ति चिन्हित होता है तो उसपर ठोस कार्यवाही करने का काम विभाग द्वारा किया जाएगा।
वहीं इस साल वन विभाग आगजनी की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए टेक्नोलॉजी का भरपूर इस्तेमाल कर रहा है। सैटलाइट के माध्यम से आगजनी की घटनाओं पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। यदि किसी जंगल में आग लगने की घटना सामने आती है तो ड्रोन के माध्यम से क्षेत्र का जायजा लेकर आग पर काबू पाया जाता है। इस वक्त वन विभाग के पास 20 ड्रोन मौजूद हैं जिनसे उत्तराखंड के लगभग हर वन क्षेत्र पर निगरानी रखी जा रही है।









