
यूपी के मिर्जापुर जिले के मड़िहान में एक नई पहल सामने आई है, जिसे ‘दीदी कैफे’ नाम दिया गया है। यह कैफे न केवल स्वादिष्ट और सस्ते भोजन का एक स्थान है, बल्कि यहां काम कर रही महिलाओं के लिए एक आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन गया है।
मिर्जापुर के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बहुत कम होते हैं, जहां महिला वर्क पॉपुलेशन रेशियो केवल 22.7% है (जनगणना 2011 के अनुसार)। ऐसे में, अदाणी फाउंडेशन ने ‘बेटी बचाओ स्वयं सहायता समूह’ के साथ मिलकर ‘दीदी कैफे’ की शुरुआत की है। इस पहल के तहत मड़िहान की महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार के साथ नियमित आय का स्रोत मिला है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हो रहा है।

कैफे की पूरी जिम्मेदारी ‘बेटी बचाओ’ स्वयं सहायता समूह की 10 महिलाओं के हाथ में है, जिनमें रिंकू देवी (अध्यक्ष), बिट्टन (सचिव), और जय ललिता (कोषाध्यक्ष) प्रमुख हैं। ये महिलाएं मड़िहान क्षेत्र के देवरी कलां गांव की निवासी हैं। इसके अलावा, एक पुरुष शेफ भी रखा गया है, जो भोजन की गुणवत्ता और स्वाद बनाए रखने में मदद करता है।
दीदी कैफे में स्थानीय स्नैक्स, मिठाइयां, लंच और डिनर उपलब्ध कराए जाते हैं। इसकी खास बात यह है कि यहां की कीमतें आम आदमी की पहुंच में रखी गई हैं। कैफे का स्थान भी बहुत सुविधाजनक है, क्योंकि यह मड़िहान तहसील कार्यालय के सामने और यूपी राज्य राजमार्ग संख्या-5 पर स्थित है, जो मिर्जापुर को रॉबर्ट्सगंज से जोड़ता है।
यह कैफे स्थानीय लोगों के साथ-साथ राहगीरों और कर्मचारियों के लिए भी एक आदर्श स्थल बन गया है। यहां की बैठने की क्षमता 35 लोगों की है, जिससे परिवार और ऑफिस स्टाफ आराम से भोजन कर सकते हैं।
दीदी कैफे की सबसे बड़ी विशेषता है इसका ध्यान स्वास्थ्य और स्वच्छता पर। यहां प्रीमियम क्वालिटी का तेल और सामग्री का उपयोग किया जाता है, और खाना बनाते समय कड़ी हाइजीन का पालन किया जाता है। इसके अलावा, कैफे में ग्राहकों के लिए साफ-सुथरी और आरामदायक बैठने की व्यवस्था है, जो छोटे कस्बों में दुर्लभ मानी जाती है।
इस पहल ने साबित कर दिया है कि जब महिलाओं को अवसर और सहयोग मिलता है, तो वे सिर्फ अपने घर नहीं, बल्कि पूरे समाज की तस्वीर बदल सकती हैं। मड़िहान का यह छोटा सा कैफे आज ग्रामीण महिलाओं की कमाई और लोगों की सेहत दोनों की उम्मीद बन चुका है।









