
हाल ही में ग्रीस, साइप्रस और इजरायल ने त्रिपक्षीय सैन्य सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते में भारत के शामिल होने की चर्चा जोरों पर है। इन तीनों देशों ने भारत को ‘3+1’ मंच में शामिल होने का निमंत्रण दिया है, जिससे भारत को रणनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण अवसर मिल सकता है। ग्रीस, साइप्रस और इजरायल के साथ भारत के पहले से अच्छे संबंध हैं, और यदि भारत इस गठबंधन में शामिल होता है, तो यह ‘मेडिटेरेनियन क्वाड’ (MedQUAD) का रूप ले सकता है।
भारत और ‘मेडिटेरेनियन क्वाड’ का रास्ता खुल सकता है
भारत के इन देशों से रणनीतिक रिश्ते पहले से मजबूत हैं। रिटायर्ड इंडियन एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने इस त्रिपक्षीय फ्रेमवर्क में भारत को शामिल करके इसे मेडिटेरेनियन क्वाड बनाने का प्रस्ताव दिया है। उनका यह सुझाव भूराजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। चोपड़ा का कहना है कि इसमें सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को भी शामिल किया जा सकता है। हालांकि, भारत ने अभी इस पर आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है।
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की का गठजोड़
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की का एक सैन्य गठबंधन बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं, जिसे ‘इस्लामिक नाटो’ कहा जा रहा है। इस गठबंधन का उद्देश्य एक सैन्य और आर्थिक शक्ति के रूप में उभरना है, जो भारत के लिए रणनीतिक चुनौती हो सकता है। इसके जवाब में भारत को ऐसे सैन्य सहयोग में शामिल होने का मौका मिल सकता है, जिसमें इजरायल जैसी मजबूत सैन्य ताकत शामिल हो।
भारत के लिए रणनीतिक मौका
सऊदी अरब और तुर्की के गठबंधन से उत्पन्न चिंताओं के बीच, भारत का इजरायल, ग्रीस और साइप्रस के साथ सहयोग भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक अवसर बन सकता है। यूएई के साथ भारत और इजरायल के मजबूत रिश्ते इसे और भी प्रभावी बना सकते हैं। इस प्रकार, भविष्य में भारत, इजरायल, यूएई, ग्रीस और साइप्रस का समूह ‘मेडिटेरेनियन क्वाड’ के रूप में उभर सकता है, जो भूराजनीतिक समीकरणों को नए रूप में प्रस्तुत करेगा।









