
Rastriya Swatantra Party (RSP) के उपाध्यक्ष दोल प्रसाद आर्याल को नेपाल की संसद के अध्यक्ष (Speaker of the House of Representatives) के रूप में सर्वसम्मत रूप से चुना गया। यह ऐतिहासिक घटना रविवार सुबह संसद की बैठक में हुई, जब वरिष्ठ सदस्य अर्जुन नरसिंह केसी ने आर्याल को एकमात्र उम्मीदवार होने के कारण अध्यक्ष पद के लिए निर्विरोध घोषित किया।
आर्याल की उम्मीदवारी शुक्रवार को दायर की गई थी और इसे पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने ने समर्थन दिया। इसके साथ ही मंत्रियों स्वर्णिम वाग्ले, सोबिता गौतम और सुनील लम्साल ने भी उनके समर्थन की घोषणा की। इसके परिणामस्वरूप दोल प्रसाद आर्याल अब नेपाल की निचली सदन के 10वें अध्यक्ष बन गए हैं और 18 वर्षों में यह पहला मौका है जब गैर-कम्युनिस्ट नेता संसद के इस उच्च पद पर बैठे हैं।
डोल प्रसाद आर्याल का जीवन और राजनीतिक सफर
दोल प्रसाद आर्याल का जन्म 1974 में माइडि, धादिङ में हुआ था। उन्होंने 1992 में बेहतर जीवन और रोजगार की तलाश में काठमांडू का रुख किया और एक रेस्टोरेंट में मजदूर के रूप में काम शुरू किया। धीरे-धीरे अपने कठिन परिश्रम और लगन से वे पर्यटन गाइड बने और बाद में जापान में शिक्षा और कार्य अनुभव प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने नेपाल और विदेश दोनों जगह की संस्कृति, पर्यटन और व्यवसाय की समझ विकसित की।
आर्याल की राजनीतिक यात्रा RSP के गठन के समय शुरू हुई, जब उन्होंने Rastriya Swatantra Party के संस्थापक केंद्रीय सदस्य के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई। तीन साल से भी कम समय में उन्होंने पार्टी के भीतर अपनी महत्वपूर्ण पहचान बनाई और अब संसद के अध्यक्ष पद तक का सफर तय किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि उनकी तेज़ी और प्रभावशीलता ने पार्टी और जनता दोनों का विश्वास जीत लिया।
राजनीतिक और कार्यकारी अनुभव
आर्याल ने पहले भी दो बार मजदूरी, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया है। इसके अलावा उन्होंने पार्टी संकट के समय RSP के कार्यवाहक अध्यक्ष का जिम्मा संभाला, जो पार्टी के आंतरिक स्थिरता और संगठनात्मक नेतृत्व में उनकी क्षमता को दर्शाता है। शांत और संयमित व्यक्तित्व के कारण उन्हें RSP के भीतर एक भरोसेमंद नेता के रूप में जाना जाता है।
आर्याल ने लगातार काठमाडौं-9 से दो चुनावों में भारी बहुमत से जीत हासिल की है। अब वे संसद के अध्यक्ष के रूप में निष्पक्ष और प्रतिष्ठित भूमिका निभाएंगे। उनका यह चुनाव न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और अनुभव को दर्शाता है, बल्कि RSP की राजनीतिक ताकत और जनता के विश्वास को भी स्पष्ट करता है।









