
अक्सर हम सोचते हैं कि पानी पीना एक साधारण काम है। प्यास लगी तो पी लिया, नहीं लगी तो नहीं पिया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर में किडनी हमेशा काम करती रहती है? किडनी का काम है खून को साफ करना, शरीर से गंदगी बाहर निकालना, नमक और पानी का संतुलन बनाए रखना, और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करना। यदि हम कम या ज्यादा पानी पीते हैं, तो इसका सीधा असर किडनी पर पड़ता है।
पानी की कमी और अधिकता के प्रभाव
- कम पानी पीने से–
जब आप पर्याप्त पानी नहीं पीते, तो शरीर में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) हो जाती है। इसका असर पेशाब पर पड़ता है, जिससे पेशाब गाढ़ा हो जाता है। किडनी पर दबाव बढ़ता है, पथरी बनने का खतरा बढ़ता है और यूरिन इन्फेक्शन हो सकता है। लंबे समय में, यह किडनी की बीमारी का कारण बन सकता है। हल्का डिहाइड्रेशन भी दिमाग की कार्यक्षमता, मूड और शारीरिक क्षमता को प्रभावित कर सकता है। - ज्यादा पानी पीने से–
कई लोग सोचते हैं कि ज्यादा पानी पीने से ज्यादा फायदा होगा। लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी नुकसानदायक हो सकता है। खासकर जब आप 3-4 लीटर से ज्यादा पानी बहुत कम समय में पीते हैं, तो इससे खून में सोडियम का स्तर घट सकता है। इसे हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है, जिसके लक्षण सिरदर्द, उलझन, चक्कर आना और गंभीर स्थितियों में दौरे या बेहोशी हो सकती है।
कैफीन और शक्कर वाले पेय
कुछ लोग सोचते हैं कि चाय, कॉफी या जूस पीने से पानी की जरूरत पूरी हो जाती है। लेकिन यह सही नहीं है। कैफीन वाले पेय (जैसे चाय और कॉफी) शरीर से पानी जल्दी बाहर निकाल सकते हैं, और ज्यादा शक्कर वाले पेय शरीर पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं। इसीलिए, सादा पानी सबसे सुरक्षित और बेहतर ऑप्शन है।
प्यास लगने का इंतजार करने से बचें
अक्सर हम प्यास लगने का इंतजार करते हैं, लेकिन जब प्यास लगती है, तब तक शरीर थोड़ा डिहाइड्रेट हो चुका होता है। इसका मतलब है कि किडनी पहले से ही अतिरिक्त मेहनत कर रही होती है। इसलिए दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहना सबसे अच्छा तरीका है।
पानी पीने का सही तरीका
पानी की सही मात्रा का अंदाजा आप पेशाब के रंग से लगा सकते हैं:
- हल्का पीला रंग: सही हाइड्रेशन का संकेत
- गहरा पीला रंग: पानी की कमी का संकेत
- साफ पानी जैसा: ज्यादा पानी का संकेत (कभी-कभी)
कितना पानी पीना चाहिए ?
सामान्य तौर पर, महिलाओं को लगभग 2.2 लीटर और पुरुषों को 3 लीटर पानी प्रतिदिन पीना चाहिए। लेकिन किडनी के मरीज, दिल की बीमारी, डायबिटीज, प्रेग्नेंट महिलाएं और बुजुर्गों को पानी की मात्रा डॉक्टर की सलाह से तय करनी चाहिए। इन स्थितियों में बहुत ज्यादा या बहुत कम पानी दोनों ही समस्याएं पैदा कर सकते हैं।









