भारत का कैपिटल एक्सपेंडिचर,अगले तीन वर्षों में निवेश क्षेत्रों के लिए भरोसेमंद संकेत

डेस्क : भारत का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) अब एक मजबूत और विश्वसनीय रिकवरी दिखा रहा है, और मार्केट स्ट्रेटजिस्ट का मानना है कि आने वाले दो से तीन वर्षों में कई महत्वपूर्ण निवेश क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की इंडिया इक्विटी स्ट्रेटेजी 2026 रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर मैक्रोइकोनॉमिक हालात, सरकार की नीति सहायता और बढ़ते प्राइवेट और घरेलू निवेशों से बड़े पैमाने पर कैपेक्स रिकवरी का माहौल बन रहा है।

डिफेंस सेक्टर: सबसे अधिक लाभ उठाने वाले क्षेत्रों में एक

कैपेक्स के इस पुश का सबसे मजबूत और संरचनात्मक लाभ डिफेंस सेक्टर को मिल रहा है। सरकार का ज़्यादा बजटीय आवंटन, मजबूत ऑर्डर पाइपलाइन, और आत्मनिर्भर भारत प्रोग्राम के तहत इंडिजिनाइज़ेशन पर ज़ोर, डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स के लिए आने वाले वर्षों में लगातार रेवेन्यू विज़िबिलिटी प्रदान कर रहा है। साथ ही, एक्सपोर्ट के मौके भी बढ़ रहे हैं, जो सेक्टर में ग्रोथ के लिए अच्छे अवसर उत्पन्न कर रहे हैं।

कैपिटल गुड्स कंपनियां: तेज़ विकास की उम्मीद

कैपिटल गुड्स कंपनियों को भी नए ऑर्डर के बड़े इन्फ्लो और ऑपरेटिंग लेवरेज के साथ बड़ी अर्निंग्स ग्रोथ की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सेक्टर के कुछ हिस्सों में वैल्यूएशन ठीक हो गए हैं, जिससे रिस्क-रिवॉर्ड बेहतर हो गया है। इसके अलावा, लंबे समय तक औसत से ज्यादा कैपेसिटी यूटिलाइज़ेशन और प्राइवेट सेक्टर निवेश में बढ़ोतरी, मामूली रेवेन्यू ग्रोथ को तेज़ प्रॉफिट एक्सपेंशन में बदल सकती है।

इंडस्ट्रियल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग: घरेलू और वैश्विक लाभ

इंडस्ट्रियल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज़ (EMS) को घरेलू कैपेक्स और ग्लोबल सप्लाई-चेन डाइवर्सिफिकेशन से बड़ा फायदा होगा। जैसे-जैसे मल्टीनेशनल कंपनियाँ “चाइना+1” स्ट्रैटेजी अपना रही हैं, भारत एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग बेस के रूप में उभर रहा है। यह भारत के इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमेशन से जुड़ी सर्विसेज़ की डिमांड को सपोर्ट कर रहा है।

प्राइवेट इन्वेस्टमेंट की बढ़ती भूमिका

हालांकि पब्लिक कैपेक्स का समर्थन पहले से बना हुआ है, लेकिन सबसे बड़ा बदलाव प्राइवेट निवेश का धीरे-धीरे वापस आना है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इससे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स, कंस्ट्रक्शन कंपनियों और इंजीनियरिंग प्लेयर्स को खास फायदा हो रहा है, खासकर उन कंपनियों को जो सड़क, रेलवे, पावर और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी हैं।

हाउसिंग डिमांड: कम इंटरेस्ट रेट का प्रभाव

कम इंटरेस्ट रेट, बेहतर अफोर्डेबिलिटी और बढ़ते घरेलू निवेशों से हाउसिंग डिमांड फिर से बढ़ रही है। इसका सकारात्मक प्रभाव रियल एस्टेट डेवलपर्स और बिल्डिंग मटेरियल कंपनियों पर पड़ रहा है। जैसे-जैसे काम तेज होता है, यह कंपनियां साइकिल की शुरुआत में पीछे रह जाती हैं, लेकिन बाद में इनके लिए संभावनाएँ और अधिक बढ़ जाती हैं।

भारत में कैपिटल एक्सपेंडिचर में हो रही वृद्धि ने अगले कुछ वर्षों में विभिन्न सेक्टर्स के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं। डिफेंस, कैपिटल गुड्स, इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और हाउसिंग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में इस वृद्धि का बड़ा फायदा होने की संभावना है। भारत में प्राइवेट और घरेलू निवेशों में बढ़ोतरी से देश की आर्थिक वृद्धि और विकास को बढ़ावा मिलेगा।

Related Articles

Back to top button