
पटियाला के रहने वाले गुरपिंदर जीत सिंह की जिंदगी पांच महीने पहले उस मोड़ पर आकर खड़ी हो गई, जहां हर रास्ता मुश्किल नजर आ रहा था। उनकी मां, बलजीत कौर, जो धीरे-धीरे खाना-पीना छोड़ रही थीं, गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। शुरुआती इलाज और टेस्ट के बाद पता चला कि मां को बच्चेदानी का कैंसर है।
गुरपिंदर के लिए यह किसी खौ़फनाक सपने से कम नहीं था। वह अपनी मां को बचाने के लिए संगरूर के टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल में इलाज कराने गए, लेकिन एक ड्राइवर की सीमित कमाई के सामने इलाज का खर्च बहुत भारी पड़ रहा था। तब, अस्पताल में एक अनजान व्यक्ति ने उन्हें मुख्यमंत्री सेहत योजना के बारे में बताया। गुरपिंदर ने योजना के तहत रजिस्ट्रेशन करवाया और फिर जो हुआ, वह उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था।
मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत सरकार ने लाखों रुपये का इलाज मुफ्त कर दिया, जिसमें महंगे टेस्ट, कीमोथेरेपी, ऑपरेशन और अस्पताल का खर्च शामिल था। गुरपिंदर की आंखों में आंसू आ जाते हैं जब वह कहते हैं, “मां को बचाने के लिए पैसे नहीं थे, लेकिन सरकार ने हमें सहारा दिया।”
हालात में सुधार के बाद मां ने आठ घंटे लंबी सर्जरी के बाद जिंदगी की डोर थामे रखी। गुरपिंदर हर पल मां के पास बैठे रहे और अब उनके चेहरे पर एक नई उम्मीद और सुकून दिख रहा है।
यह कहानी सिर्फ इलाज की नहीं, बल्कि एक बेटे के संघर्ष और उस मां के प्रति उसके अटूट प्रेम की है। मुख्यमंत्री सेहत योजना ने इस परिवार को टूटने से बचाया और नई उम्मीद की किरण दिखाई।









