
22 मार्च 2023 को फाइनेंसियल टाइम्स अखबार की वेबसाईट पर “Indian Data Reveals Adani empire’s reliance on offshore funding” हैडलाइन के साथ अडानी ग्रुप के सम्बन्ध में एक खबर छपी. जिसे लेकर वृहद अडानी समूह ने फाइनेंसियल टाइम्स को स्पष्टीकरण जारी करते हुए एक खत भेजा और प्रकाशन सामग्री के मुलभुत रूप से गलत करार दिया.
अडानी समूह ने फाइनेंसियल टाइम्स पर आरोप लगाया किया कि “Indian Data Reveals Adani empire’s reliance on offshore funding” के तहत छपी खबर में अडानी समूह से जुड़े परिणामी आंकड़ों में अशुद्धियां थीं. इसे लेकर अडानी समूह ने फाइनेंसियल टाइम्स को एक पत्र भी लिखा है.
फाइनेंसियल टाइम्स की वेबसाईट पर छपी खबर को लेकर अडानी समूह द्वारा जारी पत्र में कहा गया, “22 मार्च 2023 का आपका लेख “Indian Data Reveals Adani empire’s reliance on offshore funding”, पहली नजर में, अडानी परिवार और अडानी समूह को सबसे खराब संभव प्रकाश में चित्रित करने का प्रयास करने का एक झूठा और जानबूझकर किया गया प्रयास है. “आपके द्वारा ऐसा किया जाना, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों का उपयोग करने में चयनात्मक होने की इच्छा के साथ प्रकटीकरणों को समझने के आपके आलसी दृष्टिकोण को दर्शाता है. यह आपके झूठे और हानिकारक आक्षेप को इंगित करता है जिसके लिए आपके रिपोर्टरों को निर्देशित किया गया था.”
पत्र में फाईनेंसियल टाईम्स के रिपोर्टरों को लेकर अडानी समुह ने लिखा है कि, “फाइनेंशियल टाइम्स ने जिन सभी लेन-देन के बारे में जांच की है, वे सभी सार्वजनिक रूप से प्रकट किए गए और सटीक हैं. आपकी यह स्टोरी पर्याप्त रूप से प्रदर्शित करती है कि आपके रिपोर्टरों ने आसानी से उन सार्वजनिक तथ्यों को सार्थक तरीके से नहीं संज्ञान लेना नहीं चुना. अडानी समूह ने पत्र में उस स्टोरी का भी हवाला दिया जिसे प्रेस रिलीज से फाईनेंसियल टाईम्स ने कभी रिपोर्ट किया था.”
पत्र में रिपोर्टर्स की लापरवाह कार्यप्रणाली का जिक्र करते हुए अडानी समूह की तरफ से कहा गया कि यदि आपके पत्रकारों ने उन सभी फाइलिंग और अन्य प्रकटीकरणों को पूरी तरह से ध्यान में रखा होता, तो वे “धन उद्गम की अस्पष्ट निधि”, “अपारदर्शी विदेशी निवेश” और “अपने व्यक्तिपरक” जैसे विशेषणों को अपनी स्टोरी में शामिल ना करते.”
अडानी समूह की तरफ से कहा गया कि18 जनवरी 2021 की स्टोरी जहां अडानी ग्रुप के प्रमोटरों ने AGEL का 20 फीसदी स्टेक टोटल एनर्जी ऑफ फ्रांस को बेंचकर, 2 बिलियन यूएस डॉलर जुटाए, इसे फाइनेंसियल टाइम्स ने लगातार कवर किया लेकिन 22 मार्च 2023 वाली एक विशेष स्टोरी को पूरी तरफ दरकिनार कर दिया.
इसके अलावा, अक्टूबर 2019 में, अडानी टोटल गैस लिमिटेड में 37.4% हिस्सेदारी की बिक्री के माध्यम से प्रमोटरों ने लगभग 700 मिलियन अमरीकी डालर जुटाए थे. यह तथ्य अडानी प्रेस विज्ञप्ति में प्रकाशित हुआ था. फिर भी फाइनेंशियल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में इस तथ्य को नजरअंदाज किया जबकि उस समय इसने ये समाचार प्रकाशित किया था.
आपकी स्टोरी में प्राथमिक और द्वितीयक निवेशों को गलत तरीके से मिश्रित किया गया है. 2 बिलियन अमरीकी डालर के द्वितीयक लेन-देन को भी पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है. यह सब कुछ इसलिए किया गया है ताकि रिपोर्टर आसानी से 2 बिलियन अमरीकी डालर के “फंडिंग में अंतर” का भ्रम पैदा कर सकें, जिससे उनकी पूर्व-कल्पित और घुमावदार थीसिस का समर्थन किया जा सके. एजीईएल इक्विटी आय को ध्यान में रखते ही यह सब दूर हो जाता है.
इसी तरह के एक अन्य स्टोरी का हवाला देते हुए अडानी समूह ने पत्र में लिखा है कि, “आपकी एक रिपोर्ट का दावा है कि “समूह को एफडीआई की आपूर्ति करने वाली अधिकांश अपतटीय शेल कंपनियों को अडानी के “प्रवर्तक समूह” के हिस्से के रूप में प्रकट किया गया है, जिसका अर्थ है कि वे अडानी या उनके तत्काल परिवार से निकटता से जुड़े हुए हैं.”
लेकिन इस पर आपत्ति के बाद आपने लिखा, “विश्लेषकों ने कहा कि अस्पष्ट मॉरीशस संस्थाओं से धन का स्थानांतरण चिंता का विषय था क्योंकि यह पता लगाना असंभव था कि धन” राउंडट्रिप “किया गया था या नहीं”
अडानी ग्रुप द्वारा पत्र में कहा गया, “हम समझते हैं कि अडानी को पटखनी देने की प्रतिस्पर्धी दौड़ आकर्षक हो सकती है. लेकिन हम प्रतिभूति कानूनों का पूरी तरह से अनुपालन कर रहे हैं और प्रवर्तक के स्वामित्व और वित्तपोषण को अस्पष्ट नहीं कर रहे हैं. एक भ्रामक नैरेटिव बनाकर, आपकी स्टोरी ने अडानी समूह की कंपनियों की प्रतिष्ठा पर असर डाला है.”
पत्र में आगे वेबसाइट से स्टोरी को हटाने का आग्रह करते हुए समूह ने पत्र के जरिए कहा, “हम आपसे कहानी को तुरंत आपकी वेबसाइट से हटाने के लिए कहते हैं. इसके अलावा, क्योंकि इस कहानी ने बाजार में और अन्य मीडिया के साथ गलतफहमी पैदा की है, और यह एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है, हम इस समय इस जानकारी को सार्वजनिक रूप से साझा करने के लिए मजबूर हैं. यह खेदजनक है, लेकिन आपके पत्रकारों द्वारा सावधानीपूर्वक और वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण अपनाने से बचा जा सकता था.”
बताया जा रहा है कि फाइनेंसियल टाइम्स की इसी खबर के आधार पर कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद राहुल गांधी ने अडानी समूह पर 20 हजार करोड़ के फर्जी और धोखाधड़ीपूर्ण लेन-देन का आरोप लगाया था. जिसकी अब कलई खुल गई है.