
उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के काफिले को उनके ही पार्टी के विधायक बृजभूषण राजपूत ने सड़क पर रोक लिया। यह घटना 30 जनवरी को हुई, जब मंत्री एबीवीपी के कार्यक्रम से लौट रहे थे और मामला जल जीवन मिशन से जुड़ी शिकायतों का था। मंत्री के काफिले को रोकते हुए विधायक ने न केवल नारेबाजी की, बल्कि स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस और विधायक समर्थकों के बीच हाथापाई तक हो गई।
विधायक का आरोप था कि जल जीवन मिशन के तहत उनके क्षेत्र की सड़कों को खोद दिया गया, लेकिन न तो पानी पहुंचा और न ही सड़कें बनीं। इसके अलावा अधिकारियों द्वारा फर्जी निस्तारण रिपोर्ट लगाए जाने का भी उन्होंने आरोप लगाया। विधायक ने इस मसले पर मंत्री को सख्त संदेश देने के लिए इस विरोध को तीव्र किया।
मंत्री ने स्थिति को शांत करने के लिए विधायक को अपनी गाड़ी में बैठाकर बातचीत की, और बाद में दोनों कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां एक घंटे तक बंद कमरे में चर्चा चली। इस घटना से सत्ता के भीतर की टकराहट साफ तौर पर उजागर हो गई है।
बृजभूषण राजपूत का राजनीतिक सफर
बृजभूषण राजपूत कोई नए नेता नहीं हैं। उनके पिता गंगा चरण राजपूत यूपी की राजनीति में विवादों और दलबदल के लिए मशहूर रहे। गंगा चरण तीन बार हमीरपुर से सांसद रहे और जनता दल, बीजेपी, कांग्रेस और बसपा तक का सफर तय किया। उनके दबंग अंदाज के कारण उनका नाम इलाके में प्रसिद्ध है। एक बार गंगा चरण ने सोनिया को पीएम बनाने के लिए खुद पर बंदूक तान ली थी।
बृजभूषण ने भी अपने पिता की तरह राजनीतिक दांवपेचों को अपनाया है। हालांकि, वह पढ़े-लिखे और पीएचडी डिग्रीधारी होने के बावजूद भी अपने काम की मांग को लेकर सख्त रुख अपनाते हैं।
सपा प्रमुख का तंज
इस घटना पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी के विधायक ने अपने ही मंत्री को बंधक बना लिया, जो यह बताता है कि सत्ता अब पटरी से उतर चुकी है। इस घटना ने यूपी की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है और सत्ता के भीतर की अंतर्निहित टकराहट को उजागर किया है।









