भौतिकी के नियमों में ज़रा सा बदलाव और खत्म हो जाएगा जीवन,क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा

डेस्क : एक ऐसे काल्पनिक ब्रह्मांड की सोचिए जहाँ तारे अपनी चमक बिखेर रहे हों, नए ग्रहों का निर्माण हो रहा हो और जलमंडल भी मौजूद हो, लेकिन वहाँ के तरल पदार्थ (लिक्विड्स) इतने अत्यधिक गाढ़े हों कि जीवित कोशिकाएं और उनमें होने वाली गतिविधियां पूरी तरह थम जाएं। भले ही जीवन के निर्माण के लिए सभी जरूरी रासायनिक तत्व मौजूद हों, लेकिन तरल पदार्थों के बहने के तरीके में रुकावट आते ही जीवन की कोई भी संभावना समाप्त हो जाएगी।

‘साइंस एडवांसेज़’ में प्रकाशित और लंदन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी के प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी कोस्त्या ट्रेचेंको द्वारा किए गए एक थ्योरेटिकल एनालिसिस में यह सनसनीखेज सच सामने आया है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि हमारे ब्रह्मांड को संचालित करने वाले बुनियादी भौतिक स्थिरांकों (फंडामेंटल फिजिकल कॉन्स्टेंट्स)—जैसे इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, चार्ज और प्लैंक कॉन्स्टेंट—की सटीक वैल्यू ही यह तय करती है कि पानी, खून या कोई भी तरल किस गति और तरलता से बहेगा।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इन बुनियादी नियमों में मात्र कुछ प्रतिशत का भी फेरबदल तरल पदार्थों की चिपचिपाहट (विस्कोसिटी) को पूरी तरह बदल सकता है। प्रोफेसर ट्रेचेंको के मुताबिक, यदि पानी की विस्कोसिटी में थोड़ा सा भी बदलाव आ जाए या वह टार और शहद जितना गाढ़ा हो जाए, तो कोशिकाओं के भीतर होने वाली ज़रूरी बायोलॉजिकल प्रोसेस और मॉलिक्यूल्स का फैलाव (डिफ्यूज़न) ठप पड़ जाएगा। इसका सीधा असर यह होगा कि हमारे शरीर में खून का बहाव रुक जाएगा और जीवन का अस्तित्व ही मिट जाएगा।

यह अध्ययन एक बेहद गहरे खगोलीय और दार्शनिक सवाल को जन्म देता है—आखिर प्रकृति के नियम इतने सटीक क्यों सेट हैं कि इनमें ज़रा सी भी ऊँच-नीच जीवन को पनपने से रोक सकती है? अरबों वर्षों से चले आ रहे इस कॉस्मिक रहस्य ने वैज्ञानिकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जीवन और भौतिकी के नियम एक-दूसरे से बेहद बारीक धागे से बंधे हुए हैं।

Related Articles

Back to top button