
Gautam Adani’s emotional message on Women’s Day. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अदानी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने अपने जीवन में अहम भूमिका निभाने वाली महिलाओं को याद किया और उन्हें अपनी “अंतरात्मा की आर्किटेक्ट” बताया। 8 मार्च 2026 को साझा किए गए एक लिंक्डइन पोस्ट में उन्होंने बताया कि उनके जीवन के मूल्यों, सोच और दृष्टिकोण को आकार देने में परिवार की महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
गौतम अदाणी ने अपने बचपन को याद करते हुए लिखा कि उन्हें जीवन के शुरुआती सबक अपनी मां से मिले। उनकी मां ने उन्हें भारत की महान कहानियों और उनमें छिपे मूल्यों से परिचित कराया। अदानी के मुताबिक, इन कहानियों में साहस, त्याग, कर्तव्य और विश्वास जैसे गहरे जीवन मूल्यों की सीख थी, जो किसी भी पाठ्यपुस्तक से कहीं ज्यादा प्रभावशाली साबित हुई।
उन्होंने अपने जीवन के उस महत्वपूर्ण मोड़ का भी जिक्र किया जब वह महज 16 साल की उम्र में घर छोड़कर मुंबई चले गए थे। अदाणी ने लिखा कि आज पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें एहसास होता है कि उनकी मां ने कितनी हिम्मत दिखाई होगी, जिन्होंने अपने बेटे को एक अनिश्चित भविष्य की ओर बढ़ने की अनुमति दी।
अपने संदेश में गौतम अदाणी ने अपनी पत्नी प्रीति अदाणी को भी खास श्रद्धांजलि दी और उन्हें “मेरे ज़मीर की रखवाली करने वाली” बताया। पेशे से एक योग्य डेंटिस्ट प्रीति अदानी ने बाद में खुद को अदाणी फाउंडेशन के काम के लिए समर्पित कर दिया। आज यह संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, सतत आजीविका और सामुदायिक विकास से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए देश के 22 राज्यों में एक करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच बना चुकी है।
अदाणी ने अपने पारिवारिक जीवन का जिक्र करते हुए अपनी बहुओं परिधि और दिवा की भी सराहना की। उन्होंने परिधि को एक कुशल और तेजतर्रार वकील बताया, जो विभिन्न विषयों पर काम कर सकती हैं, जबकि दिवा को एक रचनात्मक डिजाइनर बताया, जिनके काम में खासतौर पर दिव्यांगों के प्रति संवेदनशीलता झलकती है।
उन्होंने अपनी तीन पोतियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी मौजूदगी जीवन में एक अलग खुशी लेकर आती है और उन्हें यह याद दिलाती है कि हर पीढ़ी की अगली पीढ़ी के प्रति जिम्मेदारी होती है। अदानी ने लिखा, “कोई व्यक्ति अपनी जिंदगी बंदरगाह, एयरपोर्ट, पावर प्लांट और कारोबार बनाने में लगा सकता है, लेकिन जब एक पोती आपकी गोद में बैठकर भरोसे से आपको देखती है, तब साफ समझ आता है कि हम आखिर यह सब क्यों बनाते हैं।”
अपने संदेश के अंत में गौतम अदाणी ने उन सभी महिलाओं का आभार व्यक्त किया जिन्होंने उनके जीवन, मूल्यों और सोच को आकार दिया। उन्होंने लिखा कि अगर दुनिया उनके सफर से कुछ याद रखे, तो वह यह कि जीवन की सबसे मजबूत नींव कंक्रीट या स्टील से नहीं, बल्कि उन लोगों से बनती है जो हमें बनाते हैं।









