गोरखपुर विश्वविद्यालय ने THE सस्टेनेबिलिटी रैंकिंग में मारी बड़ी छलांग, भूख और स्वच्छ ऊर्जा मामले में दुनिया के शीर्ष-500 में बनाई जगह

गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयूजीयू) ने वैश्विक स्तर पर अपनी एक और मज़बूत पहचान बनाई है। टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) सस्टेनेबिलिटी इम्पैक्ट रैंकिंग्स 2026 में विश्वविद्यालय ने ज़बरदस्त सुधार करते हुए न केवल अपनी समग्र रैंकिंग बेहतर की, बल्कि दो अहम श्रेणियों में दुनिया के शीर्ष 500 संस्थानों में जगह भी पक्की कर ली।

कितनी बड़ी है यह उपलब्धि?

पिछले वर्ष विश्वविद्यालय 1501+ बैंड में था। इस बार उसने सीधा 1001-1500 बैंड में जगह बनाई। इससे भी बड़ी बात यह रही कि संयुक्त राष्ट्र के दो सतत विकास लक्ष्यों, SDG 2 (भूख-मुक्त विश्व) और SDG 7 (सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा) , में गोरखपुर विश्वविद्यालय को विश्व के शीर्ष 500 विश्वविद्यालयों में शुमार किया गया।

मूल्यांकन का पैमाना

THE सस्टेनेबिलिटी इम्पैक्ट रैंकिंग्स संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में संस्थानों के योगदान को परखती है। इसमें चार बड़े आधार होते हैं, शोध, शिक्षण, संस्थागत प्रबंधन व संसाधन संरक्षण, और सामुदायिक सहभागिता व विस्तार गतिविधियाँ। इस बार दुनिया भर के 1,603 विश्वविद्यालयों का आकलन हुआ, जिनमें भारत के 110 संस्थानों को जगह मिली।

उत्तर प्रदेश में कहाँ खड़ा है डीडीयूजीयू?

उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में महज़ पाँच को ही इस प्रतिष्ठित रैंकिंग में स्थान मिल पाया है। उन्हीं में से एक है दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय। यह आँकड़ा बताता है कि प्रदेश के अग्रणी राज्य विश्वविद्यालयों की सूची में अब डीडीयूजीयू और मज़बूती से शामिल हो गया है।

प्रयासों से मिली यह सफलता

विश्वविद्यालय का कहना है कि यह उपलब्धि राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के दूरदर्शी नेतृत्व और लगातार मार्गदर्शन का नतीजा है। उनकी सोच है कि उच्च शिक्षा संस्थानों को समाज और पर्यावरण के प्रति ज़्यादा जवाबदेह बनना चाहिए। इसी सोच ने विश्वविद्यालय की पूरी कार्यसंस्कृति को दिशा दी है।

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने विश्वविद्यालय परिवार के हर सदस्य को बधाई देते हुए कहा, यह सफलता हमारे शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों के सामूहिक समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने भरोसा जताया कि भविष्य में विश्वविद्यालय सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में और अधिक प्रभावी भूमिका निभाएगा।

ज़मीन पर दिखता है काम

विश्वविद्यालय पोषण और खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा बचत, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य जागरूकता, ग्रामीण विकास, कौशल विकास और सामाजिक समावेशन जैसे मोर्चों पर लगातार सक्रिय है। एनएसएस, एनसीसी और विभिन्न विस्तार कार्यक्रमों के ज़रिए बड़े पैमाने पर जनहितकारी गतिविधियाँ चलाई जा रही हैं। साथ ही सतत विकास से जुड़े शोध और नवाचार को भी लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।

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