
लोकसभा में आज वक्फ संशोधन बिल पेश किया गया, जिसे संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में रखा। इस बिल को लेकर काफी हंगामा हुआ और विपक्ष ने कड़े सवाल उठाए। सरकार ने इस बिल को धर्म और समाज के सभी वर्गों के हित में बताया, जबकि विपक्ष ने इसके विरोध में अपनी आपत्ति जताई। दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि, ” अगर हमारी सरकार ये बिल नहीं लाती तो संसद भवन भी वक्फ संपत्ति में आ जाती।”
किरन रिजिजू ने बिल का बचाव करते हुए कहा कि वक्फ संपत्ति प्रबंधन का मामला है और यह किसी धर्म या धार्मिक व्यवस्था में हस्तक्षेप नहीं करता है। उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ बिल से जुड़ी किसी भी संपत्ति पर अब सरकार का पूरा नियंत्रण होगा और उसमें सुधार के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। “वक्फ बोर्ड में 10 मुस्लिम सदस्य होंगे, जिसमें 2 महिला सदस्य अनिवार्य होंगे और 4 गैर-मुस्लिम सदस्य भी होंगे”।
विपक्ष की आपत्ति
विपक्ष के नेताओं ने वक्फ बिल पर कई सवाल उठाए। कांग्रेस नेता एम. वीरेंद्र गोपाल ने बिल की कॉपी देर से मिलने का मुद्दा उठाया और इसे घेरते हुए कहा कि इसे ठीक से पढ़े बिना कोई चर्चा नहीं हो सकती। अमित शाह ने भी इस मुद्दे पर जवाब देते हुए कहा कि इस बिल पर विस्तृत चर्चा हुई है और JPC की रिपोर्ट को भी ध्यान में रखा गया है। उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी कि यदि वे विरोध करना चाहते हैं तो तर्क के साथ करें।
वक्फ संपत्तियों का सत्यापन
रिजिजू ने बताया कि देश में वक्फ की 8.72 लाख संपत्तियाँ हैं, लेकिन इसके बावजूद मुस्लिम समुदाय के कई लोग गरीब क्यों हैं, यह सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अब वक्फ संपत्तियों का सही तरीके से ऑडिट किया जाएगा और सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि इन संपत्तियों का उपयोग सही उद्देश्य के लिए हो।
विपक्ष का प्रतिक्रिया
विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि यह बिल वक्फ बोर्ड के कामकाज में हस्तक्षेप करेगा और इसे समाज में असंतोष फैलाने की साजिश बताया। हालांकि, रिजीजू ने स्पष्ट किया कि यह बिल किसी धर्म के खिलाफ नहीं है और इसमें किसी भी धर्म के अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जाएगा।
संसद भवन पर वक्फ का दावा
रिजिजू ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया कि वक्फ ने संसद भवन पर भी दावा किया था। उनका कहना था, “अगर हम यह बिल नहीं लाते, तो संसद भवन भी वक्फ संपत्ति के तहत हो सकता था।”
बिल के तहत वक्फ बोर्ड की संरचना में कई बदलाव प्रस्तावित हैं…
- बोर्ड में शिया और सुन्नी दोनों समुदायों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
- 3 सांसदों को बोर्ड में जगह दी जाएगी।
- 2 महिला सदस्यों की नियुक्ति अनिवार्य होगी।
- 10 मुस्लिम सदस्य होंगे, जिनमें पिछड़े मुसलमानों का प्रतिनिधित्व भी शामिल होगा।
- 2 पेशेवर सदस्य (प्रोफेशनल्स) भी बोर्ड का हिस्सा बनेंगे।
अंतिम निर्णय
वक्फ संशोधन बिल पर सदन में चल रही बहस के बीच, रिजिजू ने यह भी कहा कि ट्रिब्यूनल का फैसला अब अंतिम नहीं होगा और रजिस्टर्ड संपत्तियों में किसी भी प्रकार की दखलंदाजी नहीं की जाएगी। इस बिल को लेकर आगे और चर्चा होनी बाकी है, लेकिन इसने संसद में एक नई बहस की शुरुआत कर दी है, जिससे आगामी दिनों में और विवाद उठ सकते हैं।