
GST 2.0 की मुख्य विशेषता है इसका सरल दो-स्तरीय कर ढांचा, जो पुराने चार-स्तरीय सिस्टम की जगह लेता है।
- 5% स्लैब: दैनिक उपयोग की वस्तुएं जैसे पैक्ड फूड, कपड़े, जूते, साइकिल, दवाइयाँ, मेडिकल उपकरण और व्यक्तिगत देखभाल उत्पाद (टूथपेस्ट, साबुन, शैम्पू, तेल) शामिल हैं। लगभग 99% वस्तुएँ जो पहले 12% में थीं, अब 5% में आ गई हैं।
- 18% स्लैब: अधिकांश वस्तुएँ और सेवाएँ, जैसे टीवी, AC, रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन, छोटे कार (<1200cc पेट्रोल, <1500cc डीज़ल, लंबाई <4m) और 350cc तक की मोटरसाइकिलें। लगभग 90% वस्तुएँ जो पहले 28% में थीं, अब 18% में आ गई हैं।
- 40% स्लैब: “सिन” और लक्ज़री वस्तुएँ जैसे तंबाकू, सिगरेट, ज़र्दा, पान मसाला और हाई-एंड कारें।
GST 2.0 के लाभ
- मूलभूत वस्तुओं पर छूट: भारतीय रोटियां, पराठा, पनीर, UHT दूध, छेना, और 33 जीवनरक्षक दवाएं।
- बीमा नीतियों पर शून्य दर: स्वास्थ्य और जीवन बीमा, परिवार फ्लोटर प्लान सहित, अब 0% GST पर।
- MSME के लिए सरल प्रक्रिया: प्री-फिल्ड GST रिटर्न, तेज़ रिफंड और आसान रजिस्ट्रेशन।
- इनपुट-आउटपुट टैक्स संतुलन: इनपुट टैक्स क्रेडिट मुक्त, कार्यशील पूंजी बढ़ी।
प्रशासनिक सरलता और आर्थिक प्रभाव
- कंपेनसेशन सेस: अब केवल तंबाकू उत्पादों पर लागू, अन्य पर समाप्त।
- समय: नए दरें 22 सितंबर 2025 से लागू, जो नवरात्रि के अवसर से मेल खाती हैं, ताकि त्योहारों के समय उपभोक्ता बचत और आर्थिक गतिविधि बढ़े।
GST 2.0 के पंच रत्न
- सरल कर प्रणाली: कम स्लैब और स्पष्ट वर्गीकरण से व्यवसायों के लिए अनुपालन आसान और उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शिता।
- जीवन स्तर में सुधार: आवश्यक और आकांक्षी वस्तुओं पर कम कर से घरेलू खर्च कम, बचत बढ़ी।
- उपभोग और विकास में वृद्धि: उपभोक्ता वस्तुएं, ड्यूरेबल्स और छोटी कारों पर रेट कटौती से मांग बढ़ेगी।
- व्यवसाय करने में सरलता: सरल अनुपालन, तेज़ रिफंड और कम इनपुट लागत से निवेश और रोजगार बढ़े।
- आत्मनिर्भर भारत को समर्थन: इन उपायों से MSME और घरेलू विनिर्माण को मजबूती।









