
आज आलू के बिना किसी भी डिश को बनाने की कल्पना करना मुश्किल लगता है। ऐसा लगता है कि सब्जियों की दुनिया में आलू ही राजा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी इसी आलू को गरीबों का खाना माना जाता था? भारतीय रसोई का अहम हिस्सा बन चुका आलू असल में एक विदेशी सब्जी है। इसका इतिहास बेहद दिलचस्प है।
विदेश की देन है आलू
आलू भारतीय पकवानों में खूब इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन यह एक विदेशी सब्जी है। अंग्रेजी शब्द ‘पोटैटो’ स्पेनिश के ‘पटाटा’ से निकला है। इतिहास के मुताबिक, पोटैटो नाम दो भाषाओं के शब्दों से मिलकर बना।
कहा जाता है कि कैरेबियाई क्षेत्र की ताइनो जनजाति के लोग इसे ‘बटाटा’ कहते थे, जबकि दक्षिण अमेरिका में इसे ‘पापा’ कहा जाता था। बाद में स्पेनिश लोगों ने इन दोनों शब्दों के मेल से ‘पोटैटो’ शब्द बनाया।
आलू दुनिया की नजरों में कैसे आया?
आलू की कहानी हजारों साल पुरानी है। इसकी सबसे पहले खोज 8000 ईसा पूर्व और 5000 ईसा पूर्व के बीच पेरू में हुई थी। दक्षिण अमेरिका की इंका सभ्यता के लोग आलू की घरेलू खेती किया करते थे।
आलू उनके लिए सिर्फ खाने की चीज नहीं था, बल्कि वे इसकी पूजा भी करते थे। यह कंदमूल सब्जी आसानी से पक जाती थी और जेब के लिए भी किफायती थी।
सोने की तलाश में पेरू पहुंचे स्पेनिश
इतिहास के मुताबिक, स्पेनिश लोग सोने की तलाश में पेरू पहुंचे थे। उन्हें यहां सोना तो नहीं मिला, लेकिन आलू के बारे में जरूर पता चला।
स्पेनिश लोग आलू को अपनी सेना के लिए रसद के तौर पर स्पेन ले गए। धीरे-धीरे आलू उनकी सेनाओं के भोजन का अहम हिस्सा बन गया। आलू खाने से सैनिकों में विटामिन सी की कमी से होने वाली स्कर्वी बीमारी का खतरा कम होता था।
यूरोप में आलू को माना गया अजीब और जहरीला
जब स्पेन के जरिए आलू यूरोप पहुंचा तो ऊंचे वर्ग के लोग इसे जड़ वाली अजीब सब्जी मानते थे। कई जगह इसे जहरीला और पशुओं के चारे के तौर पर देखा गया। यही वजह रही कि पूरे यूरोप में इसे लोकप्रिय होने में काफी समय लगा।
1570-80 के दशक में आलू धीरे-धीरे इटली, फ्रांस, ऑस्ट्रिया और बेल्जियम तक पहुंचने लगा। हालांकि, इसे जहरीला और खतरनाक मानकर कई जगह प्रतिबंध भी लगाए गए।
आलू को लेकर फैली इन अफवाहों की वजह से उसे इतिहास में कई प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा। यही आलू आज दुनिया के कई देशों की रसोई का अहम हिस्सा बन चुका है।









