
Lucknow News: लखनऊ के गोसाईंगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत रहने वाले युवक को सन् 2000 में बलात्कार के केस में जेल की सजा हुई थी। 23 साल के बाद कोर्ट के आदेश के बाद आरोपी जेल से रिहा हो गया। उच्च न्यायालय ने पीड़िता की गवाही पर संदेह के आधार सजा रद्द कर, रिहा करने का निर्देश दिया।
दरसल ये पूरी घटना लखनऊ के गोसाईंगंज थाना क्षेत्र में जनवरी, 1997 में हुई थी। जिसमें एक युवक को दोषी करार देते हुए उम्रकैंद की सजा सुनाई गई थी। लेकिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को बलात्कार की सजा को रद्द कर दिया। क्योंकि पीड़िता की गवाही की विश्वसनीयता पर संदेह था, जो अदालत की राय में, ‘अस्थिर’ या अविश्वसनीय थी।
न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की पीठ ने मेडिकल रिपोर्ट के अलावा पीड़िता की उम्र के बारे में सबूतों की अनुपस्थिति पर प्रकाश डाला। जिसमें पुष्टि की गई कि वह 16 वर्ष से अधिक थी। इस संबंध में, न्यायालय ने कहा कि असंशोधित भारतीय दंड संहिता के अनुसार, उस समय (वर्ष 1997 में) संभोग के लिए सहमति की उम्र 16 वर्ष थी।









