
डेस्क : वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर लोगों की सेहत के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। हवा में मौजूद बारीक प्रदूषक कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर फेफड़ों और श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और पराली जलाने जैसी गतिविधियां प्रदूषण बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। ऐसे में घर से बाहर निकलने वाले लोगों के लिए सावधानी बरतना जरूरी है।
प्रदूषित हवा के संपर्क में लंबे समय तक रहने से खांसी, सांस लेने में परेशानी और अस्थमा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पहले से सांस या हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोगों, बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। कुछ आसान आदतें अपनाकर प्रदूषण के संपर्क को कम किया जा सकता है।
- बाहर निकलते समय अपनाएं ये सावधानियां
जब वायु गुणवत्ता खराब हो, तो बाहर बिताए जाने वाले समय को कम रखने की कोशिश करें। जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क पहनें, जो हवा में मौजूद कई बारीक कणों के संपर्क को कम करने में मदद करता है। सामान्य कपड़े का मास्क या रुमाल प्रदूषण के बारीक कणों से पर्याप्त सुरक्षा नहीं देता।
AQI बहुत खराब होने पर खुले स्थानों में दौड़ने, जॉगिंग या कठिन व्यायाम करने से बचें। इसके बजाय घर के अंदर हल्की शारीरिक गतिविधियां की जा सकती हैं। बाहर निकलने से पहले स्थानीय वायु गुणवत्ता का स्तर देखना भी उपयोगी है।
2. घर के अंदर की हवा को रखें साफ
प्रदूषण का असर केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहता। बाहर की प्रदूषित हवा घर के अंदर भी पहुंच सकती है। प्रदूषण बढ़ने पर खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें, खासकर उस समय जब बाहर की हवा अधिक खराब हो। हवा की गुणवत्ता बेहतर होने पर वेंटिलेशन किया जा सकता है।
संभव हो तो कमरे के आकार के अनुसार HEPA फिल्टर वाला एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करें और उसके फिल्टर की नियमित सफाई या बदलाव करें। घर में धूल जमा न होने दें और धूपबत्ती, अगरबत्ती, मोमबत्ती तथा मच्छर भगाने वाली कॉइल से निकलने वाले धुएं से बचें। केवल इनडोर पौधों को वायु प्रदूषण से बचाव का पर्याप्त उपाय न मानें।
- खानपान में शामिल करें पौष्टिक चीजें
प्रदूषण से बचाव के लिए संतुलित आहार और पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। फल, हरी सब्जियां, दालें, मेवे और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शरीर को जरूरी विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सिडेंट प्रदान करते हैं। विटामिन-C, विटामिन-E और ओमेगा-3 फैटी एसिड वाले खाद्य पदार्थ संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं।
हालांकि, किसी खास भोजन या सप्लीमेंट को प्रदूषण से होने वाले नुकसान का निश्चित बचाव नहीं माना जा सकता। पौष्टिक आहार के साथ प्रदूषित हवा के संपर्क को कम करना भी महत्वपूर्ण है।
- व्यायाम करें, लेकिन सही समय और जगह पर
नियमित शारीरिक गतिविधि सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन प्रदूषण के उच्च स्तर पर बाहर कठिन व्यायाम करने से सांस के साथ शरीर में जाने वाले प्रदूषकों की मात्रा बढ़ सकती है। ऐसे समय में घर के अंदर हल्का व्यायाम करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
योग या धीमी गति से सांस लेने के अभ्यास आराम और तनाव कम करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन प्राणायाम या डीप ब्रीदिंग प्रदूषकों को फेफड़ों से बाहर निकालने का प्रमाणित तरीका नहीं है। यदि किसी अभ्यास के दौरान सांस फूलने या असहजता महसूस हो, तो उसे रोक दें।
- इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
प्रदूषण के संपर्क में आने पर लगातार खांसी, गले में जलन, आंखों में परेशानी, सीने में जकड़न या सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यदि ये लक्षण लगातार बने रहें या बढ़ें, तो डॉक्टर से सलाह लें। सांस लेने में गंभीर परेशानी या सीने में तेज दर्द होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें।









