आखिर कैसे मिला आंध्र प्रदेश में 50 टन सोने का खजाना? जानिए देश की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर, हर सवाल का जवाब

अमरावती। आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। यहां के जोन्नागिरी गांव में करीब 50 टन सोने का विशाल भंडार मिला है, जिसकी कीमत 7500 से 9000 करोड़ रुपये के बीच आंकी जा रही है। आइए समझते हैं कि यह खोज क्यों इतनी बड़ी है और इसके क्या मायने हैं।

आखिर यह खोज इतनी अहम क्यों है?

भारत हर साल लगभग 800 टन सोने की खपत करता है, लेकिन हमारा अपना उत्पादन महज डेढ़ टन सालाना के आसपास है। यह सारा सोना कर्नाटक की हुट्टी गोल्ड माइंस से आता है, जो फिलहाल देश की इकलौती सक्रिय बड़ी सोने की खदान है। वर्ष 2000 में कर्नाटक की ही मशहूर कोलार गोल्ड फील्ड्स बंद हो गई थी, जिसके बाद से घरेलू उत्पादन लगातार गिरता गया। ऐसे में हम अपनी जरूरत का 95 प्रतिशत से अधिक सोना आयात करते हैं, जिस पर भारी-भरकम विदेशी मुद्रा खर्च होती है। अब जोन्नागिरी की यह खोज इस स्थिति को बदलने की दिशा में पहला बड़ा कदम है।

कितना पुराना है जोन्नागिरी प्रोजेक्ट?

यह कोई रातों-रात हुई खोज नहीं है। करीब एक दशक पहले ही सरकार ने जोन्नागिरी गांव में सोने के खनन के लिए 1500 एकड़ जमीन आवंटित कर दी थी। शुरुआती चरण में केवल 500 एकड़ पर ही खोज का काम हो सका था, जहां 13 टन सोना मिलने का अनुमान लगाया गया था। अब शेष 1000 एकड़ जमीन पर भी जल्द ही खोज शुरू होने वाली है और पूरी बेल्ट को मिलाकर कुल भंडार 50 टन पार जाने की उम्मीद है।

खनन की प्रक्रिया क्यों है इतनी जटिल?

धरती के गर्भ से सोना निकालना बेहद खर्चीला और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण काम है। खान विभाग के प्रधान सचिव मुकेश कुमार मीणा ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा साझा किया, आज के समय में एक टन खनन सामग्री की प्रोसेसिंग करने पर महज एक ग्राम शुद्ध सोना निकलता है। पहले यह दर तीन ग्राम प्रति टन हुआ करती थी। अगर यह दर 0.8 ग्राम से नीचे चली जाए तो खनन करना आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बन जाता है। यही वजह है कि भारी निवेश और विशेष तकनीक की जरूरत को देखते हुए सरकार ने पारदर्शी टेंडर के जरिए निजी कंपनियों को यह काम सौंपने का फैसला किया है।

सिर्फ जोन्नागिरी ही नहीं, ये इलाके भी हैं संभावनाओं से भरे

राज्य सरकार ने जोन्नागिरी के अलावा चार और स्थलों, रामागिरी, जव्वकुला और चिगुरुकुंटा बिस्नाटम, को सोने के खनन के लिए चिन्हित किया है। इन सभी जगहों पर जल्द ही विस्तृत खोज का काम शुरू किया जाएगा।

कब से शुरू होगा असली काम?

इस पूरी महत्वाकांक्षी परियोजना को रफ्तार देने के लिए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू इसी महीने के अंत में आधिकारिक रूप से जोन्नागिरी गोल्ड माइनिंग के काम का शुभारंभ करेंगे। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से खनन कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा।

क्या सस्ता हो जाएगा सोना?

यह सबसे बड़ा सवाल है। विशेषज्ञों का मानना है कि महज एक खदान से देश की 800 टन की सालाना मांग को पूरा कर पाना संभव नहीं है, लेकिन इससे आयात पर निर्भरता जरूर कम होगी। स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ने से परिवहन और आयात शुल्क की लागत घटेगी, जिसका सीधा फायदा आम खरीदारों को मिल सकता है। साथ ही इस परियोजना से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की भी प्रबल संभावना है।

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