अमेरिकी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, दूषित पेयजल के कारण अमेरिकियों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ा

अमेरिका में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर EWG द्वारा दी गयी रिपोर्ट में बताया गया है कि इस सम्बन्ध में शोधकर्ताओं ने नल के पानी में कीटनाशकों और रेडियोधर्मी पदार्थों सहित 56 नए दूषित पदार्थों की खोज की है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह समस्या मुख्य रूप से हमेशा बने रहने वाले और अक्षय जहरीले रसायनों के प्रदुषण से उत्पन्न होती है। ये जहरीले रसायन पानी, हवा, भोजन या यहां तक ​​​​कि शैम्पू या मेकअप में भी पाये जा सकते हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका की एक प्रमुख पर्यावरणीय संस्था ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यूएस में रहने वाले लाखों लोगों को दूषित पानी पीने के कारण कैंसर और लीवर की बीमारी जैसी कई समस्याओं के विकसित होने का खतरा बना हुआ है। पर्यावरण कार्य समूह (EWG) ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि जिस नल के पानी का सेवन अमेरिकियों द्वारा दैनिक आधार पर किया जाता है उसमें जहरीले संदूषक पाए गए हैं। ये संदूषक कैंसर और लीवर की बीमारी जैसी कई जानलेवा समस्याओं का कारण बनते हैं।

दरअसल, अमेरिका में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर EWG द्वारा दी गयी रिपोर्ट में बताया गया है कि इस सम्बन्ध में शोधकर्ताओं ने नल के पानी में कीटनाशकों और रेडियोधर्मी पदार्थों सहित 56 नए दूषित पदार्थों की खोज की है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह समस्या मुख्य रूप से हमेशा बने रहने वाले और अक्षय जहरीले रसायनों के प्रदुषण से उत्पन्न होती है। ये जहरीले रसायन पानी, हवा, भोजन या यहां तक ​​​​कि शैम्पू या मेकअप में भी पाये जा सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पिछले दो वर्षों में पूरे अमेरिका से लगभग 50,000 जलीय जंतुओं का अध्ययन किया। इस दौराम उन्होंने पाया कि एक विशेष प्रकार का रसायन परफ्लुओरोएल्कील और पॉलीफ्लुओरोएल्कील पदार्थ (Perfluoroalkyl and Polyfluoroalkyl Substances ; PFAS) के कई हजार प्रकार हैं, लेकिन उनकी सामान्य विशेषता यह है कि वे बहुत धीरे-धीरे विघटित होते हैं। यह विघटन ना के बराबर होता है इसीलिए कई बार ऐसा माना जाता है कि इस किस्म के रसायन कभी खत्म नहीं होते, क्योंकि इनका विघटन बिल्कुल प्लास्टिक के समरूप होता है।

ये रसायन जब एक बार जल के जरिये निगल लिए जाते हैं तब ये शरीर में जमा होने लगते हैं। कुछ दूसरे अध्ययनों के अनुसार, PFAS के संपर्क में आने से प्रजनन क्षमता, बच्चों के विकास में देरी, मोटापा, प्रोस्टेट, किडनी या टेस्टिकुलर कैंसर के जोखिम में वृद्धि हो सकती है। यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा देता है। इसके आलावा कुछ संक्रमणों या इसके उपचार में लगे टीकों के बाद प्रतिरक्षा प्रणाली भी प्रभावित होती है।

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