
Human Body: हमारे शरीर में दो आंख और दो कान ही क्यों होते हैं? इसके पीछे क्या लॉजिक है…हम लोगों में से कभी किसी ने इस बात पर ध्यान दिया है क्या? नहीं ना…
कहते है कि हमारा शरीर देखने और सुनने के लिए कुदरती तौर पर सबसे सटीक बना गया है….जिसमें कोई भी चूक नहीं की गई है…
ऐसे में इस रहस्य के पीछे की सच्चाई क्या है चलिए आपको बताते हैं…
हमारी आंखें चेहरे पर थोड़ी दूरी पर होती हैं और इस छोटी सी दूरी से काफी बड़ा फर्क पड़ता है. हर आंख एक ही चीज की थोड़ी अलग तस्वीर खींचती है. इसके बाद दिमाग इन दोनों तस्वीरों को मिलाकर एक ऐसी चीज बनाता है जिसे वैज्ञानिक डेप्थ परसेप्शन कहते हैं.
यह काबिलियत हमें दूरियों का सही अंदाजा लगाने में मदद करती है. चाहे वह गेंद पकड़ना हो, गाड़ी चलाना हो या बस बिना किसी चीज से टकराए चलना हो. सिर्फ एक आंख होने पर गहराई का यह एहसास काफी कमजोर हो जाता है. इससे रोजमर्रा के काम करना कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाता है.
ठीक उसी तरीके से हमारे कानों का भी हाल है… जहां पर सुनने का मतलब सिर्फ आवाज को पहचानना नहीं है. बल्कि यह जानना भी है कि वह कहां से आ रही है. दो कानों की मदद से दिमाग हर कोने तक पहुंचने वाली आवाज के समय और उसकी तेजी में आए काफी छोटे फर्क की तुलना कर पाता है. जैसे अगर कोई आवाज आपकी दाएं तरफ से आती है तो वह आपके बाएं कान के मुकाबले आपके दाएं कान तक एक सेकंड के काफी छोटे हिस्से पहले पहुंचती है. आपका दिमाग इस फर्क को तुरंत समझ लेता है.
कुदरत शायद ही कभी कोई जोखिम उठाती है और यहीं पर चीजों का जोड़ी में होना काम आता है. अगर एक आंख या फिर कान खराब हो जाए तो दूसरा तब भी काम करता रहता है. इससे यह पक्का हो जाता है कि इंसान की देखने या फिर सुनने की शक्ति पूरी तरह से खत्म ना हो जाए.









