
इस साल पहली बार युगांडा की टीम क्वालीफाई करके क्रिकेट विश्व कप खेलने वाली है. युगांडा टीम के जुमा मियागी एक 21 वर्षीय मेहनती और प्रेरणादायक गेंदबाज हैं. मियागी युगांडा की राजधानी कंपाला के वासी हैं. कम्पाला एक ऐसा शहर है जहां कि 60 प्रतिशत जनसंख्या जुग्गी और बस्ती में रहती है. मियागी खुद एक नागुरू नामक बस्ती में रहते हैं , जहां पर ना तो पीने को साफ पानी है और ना ही स्वास्थ्य , इलाज की सुविधा है. मियागी अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए रोज कठिनाई का सामना करते हैं.
उनके पास अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए कोई आय का स्रोत भी नहीं है. बात करें , तो उनके देश में फुटबॉल का खेल मुख्य रूप से प्रसिद्ध है ,पर , मियागी का क्रिकेट के लिए प्रेम इतना असीम है कि उन्होंने हमेशा क्रिकेट के खेल को ही चुना ,कड़ी मेहनत करी और परिणामस्वरूप वह विश्व कप के लिए क्वालीफाई कर गए.
भारत के अभय शर्मा जो युगांडा क्रिकेट टीम के हेड कोच हैं , उन्होंने बताया कि टीम के कुछ खिलाड़ी बहुत गरीब परिवार से आते हैं. उन्हें राष्ट्रीय टीम के लिए खेलते देखना प्रेरणादायक है. मैंने कभी नहीं सोचा था कि वे ऐसी परिस्थितियों में रहते होंगे .वे कोचों का सम्मान करते हैं. उनका मानना है कि हम उनका जीवन बदल देंगे. इस देश के क्रिकेट में आगे बढ़ने के लिए हमें बेहतर व्यवस्था और बुनियादी ढांचे की जरूरत है. देश में खेल को अंडर-16 स्तर पर पेश किया जाना चाहिए. यहां पर केवल दो मैदान हैं. कूकाबुरा गेंदों और पौष्टिक भोजन के लिए भी लड़ाई की स्थिति है. आगे उन्होंने बताया कि टीम के खिलाड़ियों की गेंदबाजी अच्छी है लेकिन बल्लेबाजी में सुधार की जरूरत है.
कोच आभय ने यह भी बताया कि ऐसा नहीं है कि वह जुग्गी और बस्ती से परिचित नहीं हैं क्योंकि मुंबई की धारावी एशिया के सबसे बड़े जुग्गी इलाकों में से एक है. पर कंपाला की स्थिति देखना उनके लिए एक अलग ही आंखें खोलने वाला अनुभव था.
बता दें कि युगान्डा की टीम वर्ल्ड कप का पहला मैच अफगानिस्तान के खिलाफ सोमवार को खेलेगी.









